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क्या है पूंछरी का लौठा, जिसका राजस्थान सरकार करेगी विकास

-राजस्थान बजट में पूंछरी के लौठा मंदिर का होगा विकास-भगवान श्री कृष्ण के सखा है पूंछरी के लौठा

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Feb 09, 2024

पूंछरी के लौठा गोवर्धन की परिक्रमा लगाने वालों की लेते हैं हाजिरी

पूंछरी के लौठा गोवर्धन की परिक्रमा लगाने वालों की लेते हैं हाजिरी

जयपुर। राजस्थान बजट में पूंछरी का लौठा मंदिर के विकास की बात कहीं गई है। बजट में बताया गया है कि राजस्थान के कई मंदिरों का विकास होगा। इसमें पूंछरी का लौठा का भी विकास किया जाएगा।
ये मंदिर कहां पर है? इसका क्या महत्व है? राजस्थान सरकार इस मंदिर का क्यों विकास करवा रही है?ï आइए आपको बताते हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी।
आप गोवर्धन की परिक्रमा करने जाते हैं तो आपको दो परिक्रमा करनी होती है। यह पूरी परिक्रमा 21 किलोमीटर की है। इसमें छोटी और बड़ी परिक्रमा का भी नाम दिया गया है। इसमें बड़ी परिक्रमा मार्ग पर दाई तरफ एक मंदिर नजर आता है। यही मंदिर ही पूंछरी का लौठा मंदिर कहलाता है।

यह है इस मंदिर की मान्यता
मान्यताओं के अनुसार जब श्री कृष्ण लीला समाप्त कर बैकुंठ जाने लगे तो उन्होंने अपने सखा पूंछरी का लौठा को गोवर्धन पर्वत की तलहटी में विराजमान किया। साथ ही कहा कि जो भक्त गिर्राज जी की परिक्रमा करें उनकी हाजरी लेनी होगी। उसी समय सखा पूंछरी का लौठा ने कृष्ण भगवान से कहा कि हाजिरी तो मैं ले लूंगा, लेकिन आपको दर्शन देने आना होगा। इसके लिए श्री कृष्ण राजी हो गए। जब गोपियों को इस घटना के बारे में पता चला तो उहोंने भगवान श्री कृष्ण को पूरे ब्रज मंडल में ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिले। इसके बाद उनको श्री कृष्ण के सखा पूंछरी के लौठा के बारे में जानकारी मिली तो उनसे पूछने के लिए आईं। इस दौरान एक सखी दूसरी सखी से बोली तू पूंछ री, तो दूसरी तीसरी से बोली तू पूंछ री। इसके बाद वह यहां से लौट गईं। इस पूछने के कारण इस स्थान का नाम पूंछरी का लौठा पड़ गया।

अन्न खाय न पानी पीवै ऐसेई पड़ौ सिलौठा
श्रीकृष्ण ने कहा- "सखा! ठीक है मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि बिना अन्न-जल के तुम स्वस्थ और जीवित रहोगे।" तभी से श्रीलौठा जी पूंछरी में बिना खाये-पिये तपस्या कर रहे हैं- 'धनि-धनि पूंछरी के लौठा। अन्न खाय न पानी पीवै ऐसेई पड़ौ सिलौठा।' उसे विश्वास है कि श्रीकृष्णजी अवश्य यहां लौटकर आवेंगे, क्योंकि श्रीकृष्ण जी स्वयं वचन दे गये हैं। इसलिये इस स्थान पर श्रीलौठा जी का मन्दिर प्रतिष्ठित है।


परिक्रमा मार्ग में आता है मंदिर
उत्तरप्रदेश के गोवर्धन मंदिर प्रसिद्ध है। इसकी परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा के एक हिस्सा राजस्थान में भी आता है। राजस्थान के नए जिले डीग क्षेत्र में यह मंदिर आता है।
उत्तर प्रदेश क्षेत्र में स्थित 21 किलो मीटर गोवर्धन पर्वत परिक्रमा मार्ग के दौरान राजस्थानमें पडऩे वाले पूंछरी का लौठा स्थल का विशेष महत्व है।
पूंछरी का लौठा गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के मार्ग में पडऩे वाले प्रमुख स्थलों में से एक माना गया है। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग 21 किलो मीटर है जिसम़े से साढ़े 19 किलो मीटर उत्तर प्रदेश और डेढ़ किलो मीटर राजस्थान में पड़ता है।

गिर्राजी के चरण भी कहते हैं
पूूंछरी के लौठा को गिर्राजजी के चरण कहा जाता है। मान्यता है कि आप परिक्रमा लगा रहे है। लेकिन इस मंदिर के दर्शन नहीं किए तो आपकी परिक्रमा अधुरी मानी जाती र्है। यहां हाजिरी लगाना जरुरी माना जाता है।

सीएम हैं गोवर्धन जी भक्त
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मूलत: भरतपुर जिले से आते हैं। इनकी गोवर्धन जी आस्था है। ये अक्सर यहां दर्शन आते रहते हैं। इनके परिवार के सभी सदस्य यहां पैदल परिक्रमा लगाते हैं। भजनलाल के सीएम बनने के बाद इनकी पत्नी ने गत वर्ष दिसम्बर में लेटकर परिक्रमा की थी।