
Navratri spacial
Chaitra Navratri 2023: नवरात्र के दिन प्रात: घर को साफ-सुथरा करके मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और सुख-समृद्धि के लिए दरवाजे पर आम या अशोक के ताजे पत्तों का तोरण लगाएं। मान्यता है कि माता की पूजा के दौरान देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी घर में प्रवेश करती हैं, लेकिन मुख्यद्वार पर बंदनवार लगी होने से ये तामसिक शक्तियां बाहर ही रह जाती हैं। इस दिन सुबह स्नानादि करके माता दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को लकड़ी की चौकी या आसन पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर स्थापित करना चाहिए।
मां दुर्गा की मूर्ति के बाईं तरफ श्री गणेश की मूर्ति रखें। उसके बाद माता के समक्ष मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं,जौ समृद्धि व खुशहाली का प्रतीक माने जाते हैं। मां की आराधना के समय यदि कोई मंत्र नहीं आता हो तो केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नौ अक्षरों वाला नवार्ण मंत्र 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' से पूजा कर सकते हैं व यही मंत्र पढ़ते हुए पूजन सामग्री अर्पित करें। माता शक्ति का यह मन्त्र अमोघ है। संभव हो तो देवी को श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरूर चढ़ाएं।
शास्त्रों की मान्यता है कि देवी इन नौ दिनों में पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर उन्हें सुख-सौभाग्य, विद्या, दीर्घायु प्रदान करती है। नवरात्र के नौ दिनों में पांच ज्ञान इन्द्रियां, पांच कर्म इन्द्रियां और एक मन, इन ग्यारह को जो संचालित करती हैं। वही परम शक्ति हैं जो जीवात्मा,परमात्मा, भूताकाश, चित्ताकाश और चिदाकाश में सर्वव्यापी है। इनकी श्रद्धाभाव से आराधना की जाए तो चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सकारात्मकता के लिए दीपक जलाना चाहिए
अपने पूजा स्थल से दक्षिण-पूर्व की तरफ घी का दीपक जलाते हुए 'ऊं दीपो ज्योति: परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दन:। दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तुते' इस मंत्र का जाप और आरती करें। देवी मां की पूजा में शुद्ध देसी घी का अखंड दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं, रोग एवं क्लेश दूर होकर सुख-समृद्धि आती है।
सुख-समृद्धि के लिए ये करें उपाय
धर्मग्रंथों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। इसमें सभी ग्रह, नक्षत्रों एवं तीर्थों का वास होता है। इनके अलावा ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, सभी नदियों, सागरों, सरोवरों एवं तैतीस कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं। वास्तु के अनुसार ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) जल एवं ईश्वर का स्थान माना गया है और यहां सत्त्व ऊर्जा का प्रभाव सबसे अधिक रहता है। इसलिए पूजा करते समय माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इसी दिशा में करनी चाहिए। वास्तु नियमों के अनुसार माता की पूजा करते समय नीले और काले रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। इन्हें अशुभ माना गया है। शक्ति अथवा किसी भी देवता की आराधना में श्रद्धा-विश्वास और समर्पण का होना अति आवश्यक है। अगर ये दोनों हैं और समर्पण भाव भी है तो आपको परमानंद की प्राप्ति होगी और सदैव मां की कृपा बनी रहेगी।
-अनीता जैन, वास्तुविद
Published on:
22 Mar 2023 10:46 am
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