
राजस्थान में दूसरे प्रदेशों के मुकाबले चाय महंगी मिलेगी। राजस्थान में चाय की पत्ती के बागान नहीं है और न ही यहां चाय की पैदावार होती है। इसके बावजूद भी यहां की राज्य सरकार ने चाय की पत्ती पर मंडी शुल्क व किसान कल्याण फीस का भार थोप दिया है। इसको लेकर प्रदेश सहित जोधपुर के चाय पत्ती व्यापारियों में रोष है और वे अपना व्यापार बंद रख विरोध जता रहे है।
राज्य सरकार की ओर से चाय पत्ती पर 1.60 पैसा मंडी शुल्क व 0.50 पैसा किसान कल्याण फीस लगाई गई है। इसके विरोध में जोधपुर कृषि उपज मंडी में व्यापारियों ने सात दिवसीय शटर डाउन घोषणा के तहत तीसरे दिन बुधवार को भी दुकानें बंद रखी। इसके बावजूद सरकार के कान पर अब तक जूं नहीं रेंगी है।
मुख्यमंत्री को भेजी है मांग
चाय के थोक व्यापारी प्रसन्नचंद मेहता ने बताया कि चाय आसाम और पश्चिम बंगाल में पैदा होती है, चाय राजस्थान की पैदावार नहीं है। देश में चाय पर 5 प्रतिशत जीएसटी के अलावा कोई कर नहीं है। ऐसे में, इन करों के भार से जहां चाय 5-10 रुपए महंगी होगी, वहीं इसका असर आम जनता पर पड़ेगा। मेहता ने बताया कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज ये शुल्क हटाने की मांग की गई है।
2006 में भी लगाया था शुल्क
मण्डोर मंडी खाद्य पदार्थ व्यापार संघ की ओर से जयपुर में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर चाय पत्ती पर लगाए गए मंडी शुल्क व किसान कल्याण फीस हटाने की मांग की। संघ सचिव भण्डारी ने बताया कि इससे पूर्व 25 जनवरी 2006 को सरकार ने चाय पत्ती पर मंडी शुल्क लगाया था। बाद में, 10 फरवरी को वापस यह आरोपित कर हटा दिया था।
Published on:
05 May 2022 06:06 pm
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