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शिक्षक दिवस: बेरोजगारों को रोजगार दिलाने की जिद्द, इसलिए देते है मुफ्त में कोचिंग

शिक्षा अब व्यापार बन चुकी है वही कुछ एेसे शिक्षक भी है जो युवाओं को उनके पैरों पर खड़ा करने की जिद्द पर अड़े हुए है।

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free coaching in dausa rajasthan

जयपुर। आज शिक्षक दिवस है और माना जाता है कि शिक्षक भगवान का रूप होता है। जहां शिक्षा अब व्यापार बन चुकी है वही कुछ एेसे शिक्षक भी है जो युवाओं को उनके पैरों पर खड़ा करने की जिद्द पर अड़े हुए है। क्योकि इन्हें बेरोजगारों को रोजगार दिलाने की जिद्द है। इसलिए यह मुफ्त में एेसे बच्चों को प्रशासनिक सेवा व प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देते है जो अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते महंगी कोचिंग कक्षाओं में जाकर सफलता के लिए संघर्ष नहीं कर सकते है।

'भाईसा' और 'दीदी' के नाम से जाने जाते है यह
दौसा जिले के यह शिक्षक दंपती पिछले छह सालों से गरीब छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी करवाकर रोजगार उपलब्ध करवा रहे है । बेरोजगार और बेसहारा युवक-युवती इन्हें 'भाईसा' और 'दीदी' के नाम से जानते है। यह ऐसा पहला युगल है जो निजी खर्चे पर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाकर उन्हें सरकारी क्षेत्र में रोजगार के मौके मुहैया करवा रहा है। दौसा में सरकारी अध्यापक विनोद मीना और अध्यापिका सीमा मीना अपने स्वयं के खर्चे पर गरीब तबके के युवक-युवतियों को 'निशुल्क गाइडेंस क्लासेज' के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी करवा रहे हैं।

अच्छी बात यह है उनके द्वारा प्रशिक्षित करीब 100 से ज्यादा युवक-युवतियों का पुलिस, एसएससी, बैंक, रेलवे, सेना और विभिन्न लोक सेवा आयोगों में चयनित भी हो चुके हैं। विनोद का कहना है कि हम खुद उस तबके से आते हैं, जहां पैसों के अभाव में हर सफलता के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जैसे-तैसे बीए पास तो हो जाते हैं लेकिन कोचिंग के महंगे खर्चों के चलते प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते हैं और प्रतिभाएं पैसों के अभाव में संघर्ष कर रोजगार के अवसर से वंचित रह जाते है। वही सीमा मीना ने बताया कि 2011 में जब हमने इस काम को करने का बीड़ा उठाया तो हर किसी ने हमारा मजाक उड़ाया लेकिन लोगों के हर तंज में हमें मजबूती दी।

यह विश्वविद्यालय के फोगाट
वही राजस्थान विश्वविद्यालय में गुरू गजेन्द्र के नाम से मशहुर यह गुरू भी कुछ एेसा ही काम कर रहे है। विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में असिस्टेंड प्रोफेफर गजेन्द्र सिंह फोगाट ने प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़ शिक्षा के क्षेत्र को अपना करियर बनाया। राजस्थान विश्वविद्यालय व इसके संघटक महाविद्यालयों में नियमित कक्षाएं लेने के बाद यह शिक्षक भी बेरोजगार युवकों को मुफ्त में प्रशासनिक सेवा भर्ती की तैयारी करवाते है।

इनकी कक्षा का हाल यह है कि यहां बैठने के लिए विद्यार्थियों को जगह नहीं मिल पाती है जिस कारण विद्यार्थी नीचे जमीन पर या बरामदों में बैठ कर पढ़ते रहते है। इनकी एक कक्षा में चार सौ से पांच सौ विद्यार्थी प्रशासनिक सेवा की तैयारी करते है। गजेन्द्र का कहना है कि मैं एक किसान परिवार से हूं और मैने वह परिस्थितियां देखी है जब एक विद्यार्थी पैसों की कमी के कारण कोचिंग कक्षा नहीं ले पाता है और उसके प्रशासनिक अधिकारी का सपना उसकी आर्थिक स्थिति तोड़ देती है।

आरएएस अधिकारी लेकिन इन्होंने लिया बालिकाओं की शिक्षा का जिम्मा
यह एेसे गुरू है जिन्होंने बालिकाओं की पढ़ाई के लिए शैक्षणिक माहौल उपलब्ध करवाया। पेशे से आरएएस अधिकारी जस्साराम चौधरी ने सन 1995 में डीडवाना में ग्रामोत्थान विद्यापीठ की शुरूआत की। जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं का पढ़ाई का सपना पूरा हो सके। इस विद्यापीठ में कक्षा 6 से 12 तक की बालिकाओं को निशुल्क पढ़ाई करवाई जाती है और इसी साल से डिग्री कॉलेज भी शुरू कर दिया गया है। साथ ही इनके रहने के लिए हॉस्टल की व्यवस्था भी यही है।

आरएएस जस्साराम ने बताया कि वह जब शहर से गांव आए तो इन्होंने देखा कि कक्षा एक से पांच तक को छात्राएं कैसे जैसे शिक्षा प्राप्त कर लेती है। लेकिन उसके बाद ना तो घरवाले उन्हें पढ़ाते है और कम उम्र में ही उनकी शादी कर देते थे। एेसे में इन आर्थिक स्थिति से कमजारे बालिकाओं को सुरक्षित शैक्षणिक माहौल देने के लिए जनसहयोग से मिलकर इस संस्था की शुरूआत की जहां से हजारों छात्राएं की पढ़ाई का सपना पूरा हो सका।


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