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पंचायत राज मंत्री के जिले में ही भयभीत हुई ऑडिट टीम, ग्राम सभा तक पहुंची ही नहीं

- करौली में दबंगों की धमकी के आगे बीच में ही छोड़ा मनरेगा का सामाजिक अंकेक्षण , सीईओ से रिपोर्ट तलब  

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पंचायत राज मंत्री के जिले में ही भयभीत हुई ऑडिट टीम, ग्राम सभा तक पहुंची ही नहीं

राजस्थान पत्रिका ने 10 जून टीम पर हमले की धमकियों का समाचार प्रकाशित किया था

जयपुर. मनरेगा के खर्च में पारदर्शिता की सरकारी पहल ने खुद पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा के गृह जिले करौली में ही दबंगों के आगे घुटने टेक दिए। योजना की सोशल ऑडिट के लिए निर्धारित दल लगातार मिल रही हमले की धमकियों से भयभीत होकर जिले की पांच ग्राम पंचायतों में प्रस्तावित ग्राम सभाओं में पहुंचा ही नहीं।

ऑडिट टीम ने अंकेक्षण का कार्य भी बीच में ही छोड़ दिया। टीम ने पांचों ग्राम पंचायतों में धमकी मिलने का आरोप लगाया, जबकि जिला परिषद अधिकारी ऑडिट नहीं होने के पीछे स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे। सामाजिक लेखा परीक्षा जवाबदेही एवं पारदर्शिता सोसायटी (एसएसएएटी) के निदेशक ने पूरे प्रकरण पर जिला परिषद सीईओ और अंकेक्षण दल से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। राज्य के 27 जिलों की 135 पंचायतों में शुक्रवार को ये ग्राम सभाएं प्रस्तावित थीं, जिनमें मनरेगा की सोशल ऑडिट की रिपोर्ट ग्रामीणों के सामने सार्वजनिक करनी थी। अधिकतर में ये ग्राम सभाएं शांतिपूर्ण हुईं। कुछेक में ग्रामीणों ने कार्यों में अनियमितता की शिकायत की।

एसडीओ तो पांच मिनट के, बाद में हम देख लेंगे

करौली सोशल ऑडिट टीम के प्रभारी अरुण जिंदल ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि गांवों में जाने पर उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थी। इस बारे में उन्होंने कलक्टर, सीईओ, ग्रामीण विकास सचिव कार्यालयों में मेल कर सूचना दे दी। अगले दिन उपखंड अधिकारी को साथ लेकर गए, लेकिन दुबारा उन्हें धमकाया गया कि एसडीओ तो पांच मिनट के लिए आते हैं। हम बाद में तुम्हें देख लेंगे। डर के कारण फिर हम ऑडिट करने गए ही नहीं।

प्रशासन कर रहा टालमटोल

इस बारे में जब जिला परिषद सीईओ महावीर प्रसाद नायक से पूछा गया तो उन्होंने छुट्टी पर होने के कारण जानकारी नहीं होने की बात कही। नायक की अनुपस्थिति में कामकाज देख रहे जिला परिषद के अधिशाषी अभियंता पी.सी.मीणा ने कहा कि वह आयोजना समिति के चुनाव में व्यस्त हैं। ऑडिट टीम 8 जून को ही चली गई।

मांगते हैं काम, मिलता नहीं

अन्य जिलों में भी ग्राम सभाओं के दौरान मनरेगा मे कई अनियमितताएं उजागर हुईं। सिरोही में आबूरोड की पंचायतों में ग्रामीणों में आवेदन करने पर भी काम नहीं देने का मामला उठाया। श्रीगंगानगर की भोजेवाला पंचायत में दो साल से मेट का मानदेय नहीं मिलने और बांसवाड़ा में कुशलगढ़ की पांच ग्राम पंचायतों में काम नहीं मिलने की शिकायत की। जोधपुर की केरु पंचायत समिति की ग्राम पंचायत बम्बोर दर्जियान में नरेगा कार्यस्थल पर छाया-पानी, मेडिकल किट, सूचना पट्ट नहीं होने और पैसा लेकर मस्टररोल में नाम लिखने की गंभीर शिकायत मिलीं।