
टेक्निकल कॉलेज अब नहीं रख पाएंगे फैकल्टीज के ऑरिजनल डॉक्यूमेंट
जयपुर . इंजीनियरिंग समेत अन्य तकनीकी कोर्स चला रहे कॉलेज अब फैकल्टीज के ऑरिजनल डॉक्यूमेंट नहीं रख पाएंगे। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीई) ने अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक के प्यूनिटिव एक्शंस (दंडात्मक कार्यवाही) की गाइडलाइन में इसे शामिल किया है। नए नियम के अनुसार यदि कॉलेज फैकल्टीज के ऑरिजनल डॉक्यूमेंट्स, सर्टिफिकेट्स जमा कर या दबा कर रख लेते हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जा सकेगी। एक एकेडमिक ईयर के लिए कोई भी एडमिशन न लेने या इंस्टीट्यूट की अप्रूवल खारिज करने जैसे प्यूनिटिव एक्शन लिए जा सकते हैं। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन का फैसला फैकल्टीज के लिए राहत का काम करेगा। ज्यादातर इंजीनियरिंग कॉलेजों में फैकल्टीज के ऑरिजनल डॉक्यूमेंट्स रिक्रूटमेंट के समय जमा कर लिए जाते हैं। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के मेंबर सेक्रेटरी प्रो. ए.पी. मित्तल का कहना है कि इसकी लगातार शिकायतें मिल रहीं थी। इसके अलावा काउंसिल ने फैकल्टीज की सैलरी समय पर न देने या कटौती कर देने संबंधी शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए इन्हें भी इस नियम में शामिल किया है।
वेबसाइट पर देनी होगी फीस की जानकारी
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन ने फीस में ट्रांसपेरेंसी रखने के लिए गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है कि सभी कॉलेजों को उनकी वेबसाइट पर फीस संबंधी जानकारी देनी होगी। कोई भी इंस्टीट्यूट स्टेट या फीस रेगुलेटरी कमेटी के द्वारा तय की गई फीस से ज्यादा किसी भी तरह की अन्य फीस को नहीं ले सकता। स्टूडेंट्स से ज्यादा फीस वसूलने पर कार्यवाही की जाएगी।
बंद नहीं होंगे कॉलेज
काउंसिल ने एडमिशन न होने पर कॉलेजों को बंद करने का फैसला टालते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक यदि कॉलेज में पिछले पांच साल में 30 प्रतिशत से भी कम एडमिशन हो रहे हैं तो एआइसीटीई एेसे कॉलेजों को बंद नहीं करेगी, बल्कि उनकी सीटों में 50 प्रतिशत की कमी कर देगी।
Published on:
24 May 2018 11:11 pm
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