तहसील परिसर में सक्रिय दलालों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान शुक्रवार को 7 स्टांप विक्रेताओं के लाइसेंस स्थाई रूप से निलंबित कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई पंजीयन एवं मुद्रांक उप महानिरीक्षक राजेंद्र प्रसाद चतुर्वेदी के निर्देश पर हुई।
सब रजिस्ट्रार द्वितीय ओमप्रकाश शर्मा ने बताया तहसील परिसर में सक्रिय दलालों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत शुक्रवार को सात स्टांप विक्रेताओं के लाइसेंस स्थाई रूप से निलंबित कर दिए गए। जब इन स्टांप विक्रेताओं के रिकार्ड को जब्त करने की कार्रवाई की गई तो इनमें से कोई भी वहां पर मौजूद नहीं था, इसलिए यह कार्रवाई आज नहीं हो सकी।
ज्ञात रहे कि राजस्थान पत्रिका ने तहसील में जाति व मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर चल रही दलाली को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचारों पर जिला कलक्टर ने उपखण्ड अधिकारी डॉ. राजेश गोयल को इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इस पर डा. गोयल ने तहसील परिसर में कार्यरत वेण्डर व डीड राइटर के बस्तों की जांच की, जिसमें कई बड़े खुलासे हुए। इसके बाद ही तहसील में जाति व मूल निवास प्रमाण पत्र बनने पर रोक लगाते हुए ई-मित्रों पर प्रमाण पत्र बनाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए।
इन स्टांप विक्रेताओं के लाइसेंस हुए निलंबित
पंजीयन एवं मुद्रांक उप महानिरीक्षक राजेंद्र प्रसाद चतुर्वेदी के निर्देश पर हुई कार्रवाई में स्टांप विक्रेता दीपक भार्गव, मीना देवी, बबीता मेहरा, जयप्रकाश मेहरा, रामहरि यादव, दिलीप कुमार एवं पदम गोपालिया के लाइसेंस स्थाई रूप से निलंबित कर दिए गए।