
जयपुर। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन (आरसीडीएफ) ( Rajasthan Co-operative Dairy Federation Limited ) लाखों रुपए की कमाई देने वाले जेएलएन मार्ग स्थित सरस पार्लर ( Saras Parlour ) को निजी हाथ में सौंपने को नए-नए तरीके ढूंढ रहा है। तीन महीने में अब चौथी बार टेंडर निकाला है। जिसमें बदलाव करते हुए विधानसभा स्थित सरस पार्लर को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। दरअसल जयपुर डेयरी से खींचतान के चलते आरसीडीएफ ने सरस पार्लरों के संचालन का जिम्मा तो उठा लिया, लेकिन एक साल भी सही तरीके से संचालन नहीं कर पाया। यहां तक कि आरसीडीएफ के अफसर भी पार्लर के संचालन की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हुए।
स्थिति यह हो गई कि जेएलएन मार्ग स्थित सरस पार्लर में कई दिनों तक सामग्री के अभाव में खानपान के प्रोडक्ट्स बंद रहे। इस पार्लर को विधानसभा स्थित पार्लर के साथ निजी हाथ में सौंपने की तैयारी की तो विधानसभा ने सुरक्षा का हवाला देते हुए निजी हाथ में देने से इनकार कर दिया। तीन महीने में चौथी बार आरसीडीएफ ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की है, जिसमेंं उन्होंने निजी फर्म आमंत्रित की है। इसमें इस बार किराया तय नहीं किया है। गौरतलब है कि इससे पूर्व सचिवालय और हाईकोर्ट स्थित पार्लर भी निजी हाथों में सौंपे जा चुके है।
यों बिगड़ रही स्थिति
सूत्रों के मुताबिक आरसीडीएफ के पास बिक्री के लिए जीएसटी नंबर नहीं है। ऐसे में पार्लर की कमाई जयपुर डेयरी में जमा होती है। इसके चलते पार्लर में कच्ची सामग्री और अन्य सामान व कर्मचारियों की सैलेरी आरसीडीएफ को खुद के खाते से देनी पड़ रही है। इसके अलावा अभी तक आरसीडीएफ यह भी तय नहीं कर पाया कि है यह घाटे में या मुनाफे में। यही वजह है कि इसे निजी हाथ में सौंपा जा रहा है।
Updated on:
31 Oct 2019 02:40 pm
Published on:
31 Oct 2019 02:36 pm
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