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सरकार ने कब्जाधारियों को दिए अब तक के सबसे सस्ते पट्टे

सरकारी जमीन पर पहली बार सबसे कम दर पर होगा नियमन
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जयपुर

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Jyoti Patel

Jun 18, 2018

jaipur news

सरकार ने कब्जाधारियों को दिए अब तक के सबसे सस्ते पट्टे

जयपुर. चुनावी साल में सरकार सस्ते पट्टों का भी कार्ड खेलेगी। जमीनों पर काबिज लोगों को सरकार अब तक की सबसे कम नियमन दर पर पट्टे देगी। अकेले जयपुर शहर में ही 100 से ज्यादा कॉलोनियां सरकारी जमीन पर बसी हैं। इन्हें अधिकतम 1500 रुपए प्रति वर्गगज तक की दर पर पट्टे देने का फैसला किया जा चुका है। प्रदेश में इससे पहले किसी भी सरकार ने सरकारी जमीन को हड़पने और भूखंड खरीदने वालों को इतनी कम दर पर नियमन नहीं किया। पिछली कांग्रेस सरकार ने आरक्षित दर या 2 हजार रुपए प्रति वर्गगज (जो भी ज्यादा हो) दर पर ही पट्टे दिए थे।

सरकारें और पट्टों पर सियासत

पिछली कांग्रेस सरकार

सरकारी जमीन पर बसी कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला किया। इलाके की आरक्षित दर या 2000 रुपए प्रति वर्गगज, दोनों में से जो भी ज्यादा हो, उस दर पर पट्टे बांटे गए।
असर : विधानसभा चुनाव में खास लाभ नहीं मिल पाया।

मौजूदा भाजपा सरकार

पिछली सरकार से भी कम दर में पट्टे बांटने का निर्णय किया है। शहरों के आधार पर नियमन दर, 400 से 1500 रुपए प्रति वर्गगज दर पर पट्टे दिए जाएंगे। जबकि यही सरकार आरक्षित दर की 25 फीसदी दर पर नियमन करती रही है। अब इसमें बदलाव कर राशि तय कर दी गई, जो सरकारी भूमि में सबसे कम दर है।

असर : प्रदेश के हजारों भूखंडधारियों के लिए पट्टे की राह खोलकर विधानसभा चुनाव में फायदा लेने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि अभी तक मास्टर प्लान को लेकर जोधपुर हाईकोर्ट की कई मामलों में अवैध गतिविधि पर रोक है।

फैसला : इस दर पर होगा नियमन

1500 रुपए प्रति वर्गगज नियमन दर जयपुर में
800 रुपए प्रति वर्गगज जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी में
600 रुपए प्रति वर्गगज शेष नगर परिषद क्षेत्रों में
400 रुपए प्रति वर्गगज दर भिवाड़ी को छोड़कर शेष नगर पालिका क्षेत्रों में
(17 जून, 1999 से पहले बसावट का प्रमाण देना होगा)

भूमाफिया को बढ़ावा देने वाला फैसला

जानकारों का कहना है कि सरकार का यह फैसला भूमाफिया और जमीनों पर कब्जा कर अवैध कॉलोनी सृजित करने वालों को बढ़ावा देगा। शहर में 25 हजार से ज्यादा भूखंड सरकारी भूमि पर बसी कॉलोनियों में सबसे बड़ा आंकड़ा जयपुर में ही है। नगरीय विकास विभाग व जेडीए अधिकारियों की मानें तो जयपुर शहर में 25 हजार से ज्यादा भूखंडधारी इससे प्रभावित होंगे।