नाहटा बताते हैं कि उनके पिता भंवरलाल नाहटा आसाम की एक कम्पनी में काम करते थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे नागौर आ गए। यहां किसी अखबार में मध्यप्रदेश के नीमच से नेत्रदान को लेकर एक समाचार पढ़ा। फिर क्या था, तुरंत सम्पर्क साधा और डाक से नेत्रदान का संकल्प पत्र भर दिया। इसके बाद 18 नवम्बर 2001 को उनका निधन हो गया और उनका नेत्रदान करवाया।