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पिता ने किया नेत्रदान, बेटे ने बना दी मुहिम

उम्र 62 साल। फिर भी जोश युवाओं जैसा। कारण, मन में बस एक ही संकल्प नागौर शहर में अधिक से अधिक हो नेत्रदान। इनके पास जैसे ही किसी के घर मौत होने की सूचना मिलती है। ये वहां हाजिर हो जाते हैं। 

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Moti ram

Apr 03, 2015

उम्र 62 साल। फिर भी जोश युवाओं जैसा। कारण, मन में बस एक ही संकल्प नागौर शहर में अधिक से अधिक हो नेत्रदान। इनके पास जैसे ही किसी के घर मौत होने की सूचना मिलती है। ये वहां हाजिर हो जाते हैं।

मौका देख परिजनों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने लग जाते हैं। कभी परिजन राजी होते हैं तो कभी स्पष्ट मना कर देते हैं। ये हैं नागौर शहर के रिखबचंद नाहटा। इनके पिता ने 15 साल पहले नेत्रदान किया।

यह नागौर शहर का पहला नेत्रदान था। फिर क्या था, पिता के इस पुण्य कर्म को बेटे रिखब ने मुहिम में बदल दिया। तब से लेकर अब तक शहर में 75 नेत्रदान हो चुके हैं। सभी नेत्रदानों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष भूमिका रही है।

पिता ने नीमच भेजा था संकल्प पत्र
नाहटा बताते हैं कि उनके पिता भंवरलाल नाहटा आसाम की एक कम्पनी में काम करते थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे नागौर आ गए। यहां किसी अखबार में मध्यप्रदेश के नीमच से नेत्रदान को लेकर एक समाचार पढ़ा। फिर क्या था, तुरंत सम्पर्क साधा और डाक से नेत्रदान का संकल्प पत्र भर दिया। इसके बाद 18 नवम्बर 2001 को उनका निधन हो गया और उनका नेत्रदान करवाया।
डॉ. गुप्ता से मिली प्रेरणा

नाहटा के अनुसार करीब डेढ दशक पहले नेत्र चिकित्सक डॉ. प्रदीप गुप्ता ने नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए शहर में एक मीटिंग बुलाई। इसमें वे भी शामिल हुए । उन्होंने नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। मन से लगा कि इससे भला पुण्य का काम और क्या हो सकता है? सबसे पहले स्वयं ने नेत्रदान का संकल्प किया और फिर जुट गए लोगों को इस पुण्य अभियान में जोडऩे के लिए। लोगों ने भी काफी सहयोग दिया।

कॉल कीजिए, हाजिर मिलेंगे
नेत्रदान की चाहत रखने वाले इस प्रकार नेत्रदान करवाते हैं। मृतक के परिजन रिखब चंद नाहटा के मोबाइल नम्बर 9414487615 पर कॉल करते हैं। इसके बाद मृतक के घर पर जाते हैं। वहां लिखित में स्वीकृति लेते हैं। फिर नेत्र चिकित्सक व नेत्र तकनीशियन को सूचना देते हैं। वे मृतक की आंखों की जांच के बाद आई बॉल्व निकालते हैं।

ये आई बॉल्ब तुरंत बीकानेर मेडिकल कॉलेज भेजी जाती है। यह समस्त कार्य महावीर इंटरनेशनल के माध्यम से किया जाता है। नाहटा इस संस्था में नेत्रदान के संयोजक भी हैं। नेत्रदाता परिवार को संस्था की ओर से सम्मान पत्र भी दिया जाता है।