
कला एवं संस्कृति विभाग राजस्थान सरकार और जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वाधान रंग मस्ताने संस्था की ओर से 10 दिवसीय रंग राजस्थान के आठवें संस्करण के तीसरे दिन मंगलवार को जवाहर कला केंद्र में दो नाटकों का मंचन हुआ।

नाटक ढाबा तपन भट्ट की ओर से लिखित और निर्देशित था, जिसका मंचन रंगायन मंच पर हुआ।

नाटक ढाबा : हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है। यहां 72 साल पहले लोकतंत्र का जन्म हुआ था। तब से आज तक लोगों ने कहा ही है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाना है मगर लोकतंत्र मजबूत नहीं हुआ। और आज तो यह बूढ़ा, लाचार, जर्जर और बेहद कमजोर होता जा रहा है। यह जलती हुई सैंकड़ो लौ की तेज गर्मी में जल रहा है।

यह गर्मी उन ढाबों से आती है जिन्हें हमारे सभी राजनीतिक दलों ने खोल रखा है। देश में जब भी कोई कांड होता है, कोई घटना घटती है तो सबके अपने-अपने ढाबे खुल जाते हैं।

सब उस कांड की आंच पर हर अपनी अपनी रोटी सेकने लगते हैं। तब लोकतंत्र के अस्तित्व से किसी को भी मतलब नहीं रह जाता।

किसी भी तरह से बस सत्ता हासिल कर लेना या सत्ताधारी को नीचे गिराना ही सभी का एक मात्र उद्देश्य रह जाता है।

आज़ादी मिली तब से ये खेल जारी है।

इस बीच लोकतंत्र कमज़ोर से कमज़ोर होता गया।

आज तो लोकतंत्र मर रहा है- वो हम सभी से अपनी दम घुटती आवाज़ में कुछ कहना चाहता है। उसकी उसी कमज़ोर आवाज़ को आप तक पहुंचाता है नाटक - ढाबा।