10 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

लोकतंत्र के अस्तित्व से किसी को मतलब नहीं, कांडों की आंच पर रोटी सेकना ही उददेश्य दिखाता नाटक ढाबा, देखें तस्वीरें

कला एवं संस्कृति विभाग राजस्थान सरकार और जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वाधान रंग मस्ताने संस्था की ओर से 10 दिवसीय रंग राजस्थान के आठवें संस्करण के तीसरे दिन मंगलवार को जवाहर कला केंद्र में दो नाटकों का मंचन हुआ। पहला नाटक बेहमी बाणियो सरताज नारायण माथुर की ओर से लिखित और निर्देशित था। वहीं दूसरा नाटक ढाबा तपन भट्ट की ओर से लिखित और निर्देशित था, जिसका मंचन रंगायन मंच पर हुआ।

3 min read
Google source verification
 जवाहर कला केंद्र

कला एवं संस्कृति विभाग राजस्थान सरकार और जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वाधान रंग मस्ताने संस्था की ओर से 10 दिवसीय रंग राजस्थान के आठवें संस्करण के तीसरे दिन मंगलवार को जवाहर कला केंद्र में दो नाटकों का मंचन हुआ।

 जवाहर कला केंद्र

नाटक ढाबा तपन भट्ट की ओर से लिखित और निर्देशित था, जिसका मंचन रंगायन मंच पर हुआ।

 जवाहर कला केंद्र

नाटक ढाबा : हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है। यहां 72 साल पहले लोकतंत्र का जन्म हुआ था। तब से आज तक लोगों ने कहा ही है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाना है मगर लोकतंत्र मजबूत नहीं हुआ। और आज तो यह बूढ़ा, लाचार, जर्जर और बेहद कमजोर होता जा रहा है। यह जलती हुई सैंकड़ो लौ की तेज गर्मी में जल रहा है।

 जवाहर कला केंद्र

यह गर्मी उन ढाबों से आती है जिन्हें हमारे सभी राजनीतिक दलों ने खोल रखा है। देश में जब भी कोई कांड होता है, कोई घटना घटती है तो सबके अपने-अपने ढाबे खुल जाते हैं।

 जवाहर कला केंद्र

सब उस कांड की आंच पर हर अपनी अपनी रोटी सेकने लगते हैं। तब लोकतंत्र के अस्तित्व से किसी को भी मतलब नहीं रह जाता।

 जवाहर कला केंद्र

किसी भी तरह से बस सत्ता हासिल कर लेना या सत्ताधारी को नीचे गिराना ही सभी का एक मात्र उद्देश्य रह जाता है।

 जवाहर कला केंद्र

आज़ादी मिली तब से ये खेल जारी है।

 जवाहर कला केंद्र

इस बीच लोकतंत्र कमज़ोर से कमज़ोर होता गया।

 जवाहर कला केंद्र

आज तो लोकतंत्र मर रहा है- वो हम सभी से अपनी दम घुटती आवाज़ में कुछ कहना चाहता है। उसकी उसी कमज़ोर आवाज़ को आप तक पहुंचाता है नाटक - ढाबा।