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सीआरपीएफ का पहला बदला पूरा, अब अगला कदम इससे बड़ा

सीआरपीएफ का पहला बदला पूरा, अब अगला कदम इससे बड़ा

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देश आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ने को तैयार है। आज दिनभर पुलवामा की मुठभेड़ पर देश की नजर बनी रही और आखिरकार शाम को खबर आई की तीन आतंकियों को ढ़ेर करने के बाद,आतंक का पहला बदला ले लिया गया है। मगर ये देश आतंक के विरुद्ध निर्णायक जंग चाहता है। भारत ने छेड़ रखी है आतंक के खिलाफ जंग…तीन तस्वीरों के जरिए आपको दिखाते हैं कि क्या कुछ हो रहा है …पहली तस्वीर मुठभेड के वक्त की है, दूसरी तस्वीर पीएम मोदी और अर्जेटीना के राष्ट्रपति की मुलाक़ात की है, तीसरी तस्वीर अंतर्राष्ट्रीय अदालत में कुलभूषण जाधव पर चल रही सुनवाई से पहले की है जहां भारत ने पाकिस्तान के अटर्नी जनरल को दिया है करारा जवाब…अपने ही अंदाज में…। मगर आतंक के खिलाफ जंग में भारत की छवि किस रूप में देखी जा रही है…क्या आती-जाती सरकारों के साथ आतंक और उससे मददगारों के खिलाफ सख्ती या फिर हिलिंग हच पॉलिसी के फेर में हम आतंक से खिलाफ अपनी जंग के तौर-तरीके बदल रहे हैं ? क्या आतंकी साजिश के बाद हम अपनी व्यवस्थाओं की,बदहालियों की पड़ताल करते हैं ? कौन है जो कश्मीर में युवाओं बना रहा है पत्थरबाज..कश्मीर में आतंक के खिलाफ जंग लड़ने वाले जवानों में सेना के जवान ओरंगजेब की भी थे…और सीआरपीएफ के जवान नसीर अहमद भी…। यानि कश्मीरी अवाम नहीं बल्कि कुछ लोग हैं जो आतंक की पौध को बढ़ाते चले आए हैं। कभी जीरो टॉलरेंस की नीति तो कभी समझौतावादी नजरिया…आतंक के लिए निर्णायक जंग में क्या ये ढूल-मूल की नीति रोड़ा अटकाती रही है…
पहले पत्थरबाजी फिर आतंकवादी क्योंकि वक्त-दर-वक्त बदलती रही है हमारे सरकारों की नीति, वक्त का तकाजा है करारा वार…बार-बार न देश ऐसे हमले झेल सकता है और न ही बर्दाश्त करने की स्थिति में है। मत भी,सभी सहमत भी हैं…जवानों की शहादत बेकार न जाए, आतंक से जंग को सियासत की हवा न लगने पाए, ये हमें तय करना है।