
शैलेन्द्र अग्रवाल / जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक ओ पी गल्होत्रा को हिदायत दी है कि ठोस कारण होने पर जांच अधिकारी को बदला जाए। जांच अधिकारियों पर निगरानी के लिए सिस्टम विकसित करने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने पूर्व मंत्री वीरेन्द्र मीणा की याचिका पर सांसद किरोड़ी लाल मीणा के गार्ड से मारपीट के 10 साल पुराने मामले में एक माह में जांच पूरी करने का आदेश भी दिया है।
न्यायाधीश के एस आहलुवालिया ने पूर्व मंत्री वीरेन्द्र मीणा की 8 साल पुरानी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान पुलिस महानिदेशक ओ पी गल्होत्रा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पी के सिंह व कोटा के पुलिस अधीक्षक अंशुमन भौमिया हाजिर हुए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता महेश गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि किरोड़ी लाल मीणा के गार्ड भोलाराम ने 16 फरवरी 2008 को लालसोट थाने में याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें याचिकाकर्ता पर मारपीट और वर्दी फाडने, किरोड़ी लाल के वाहन को टक्कर मारने का आरोप लगाया।
याचिका में कहा कि गार्ड के अनुसार किसी ने घटना में वीरेन्द्र मीणा के शामिल होने की जानकारी दी। पुलिस ने इसमें किसी को जाहिरा चोट नहीं आने की बात कही। कोर्ट ने सुबह यह याचिका सामने आने पर पुलिस महानिदेशक को तलब किया। इस पर पुलिस महानिदेशक दोपहर बाद हाईकोर्ट पहुंचे, कोर्ट ने उनसे कहा कि केवल यह मामला ही नहीं, आपराधिक मामलों में जांच सालों तक चलती है। इसकी वजह क्या है। कोर्ट ने जांच मशीनी अंदाज में किए जाने की बात भी कही।
कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी बार-बार बदलने से प्रकरण के नतीजे पर भी असर होता है। इस पर पुलिस महानिदेशक ने कहा कि प्रभावित पक्षकार के आग्रह पर निष्पक्ष जांच के लिए जांच अधिकारी बदला जाता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस कारण जांच अधिकारी को नहीं बदला जाए। यह भी कहा कि वीरेन्द्र मीणा के मामले में उसके खिलाफ कोई मामला बनना पाया जाए तो उनको फिर से याचिका दायर करने की छूट रहेगी।
Published on:
16 Mar 2018 07:40 pm

बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
