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जयपुर
प्रतापमंदिर कक्ष में हवामहल बनाने वाले महाराज के साथ सेल्फी का लोगों में दिखा क्रेज जयपुर। शहर के पर्यटन के सर का ताज कहलाने वाले हवामहल में हवामहल के निर्माणकर्ता महाराजा सवाई प्रताप सिंह का पुतला लगाया। माय स्टेम्प, मूर्ति कलादीर्घा, बेबी फीडिंग रूम और ब्रेल लिपी में ब्रोशर प्रकाशित करने के बाद हवामहल प्रबंधन की ओर से पर्यटकों को कुछ नया और खास देने की कोशिश में इस आदमकद पुतले को यहां स्थापित किया गया है। हवामहल में बने प्रतापमंदिर कक्ष में ही इसे स्थापित किया गया है। हवामहल की अधीक्षक सरोजिनी चंचलानी ने बताया कि पर्यअकों को हमेशा कुछ अलग अनुभव कराने के मकसद से इसे बनवाया गया है। हमें खुशी है कि पर्यअकों ने इसे काफी पसंद किया और इसके साथ सेल्फी एवं ग्रुफी लेने का उनमें क्रेज दिखाई दे रहा है।
हवामहल और प्रतापमंदिर का इतिहास हवामहल का निर्माण महाराजा सवाई प्रतापसिंह ने वास्तुकार लालचंद उस्ता की देख-रेख में 1799 में करवाया था। महाराजा ने इस महल को अपने ईष्ट देव श्रीकृष्ण के मुकुट के अनुरूप निर्मित करवाय था। पांच मंजिला इस इमारत में छोटी-बड़ी खिड़कियां बनी हुई हैं। इन मंजिलों को शरद मंदिर, रतन मंदिर, चिचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर एवं हवा मंदिर कहते हैं। महल में प्रतापमंदिर महाराजा का निजी कक्ष था जहां उनके आराध्य प्रभु कृष्ण की प्रतिमा उनके एकासंत में भक्ति के लिए स्थापित थी। प्रतापमंदिर के बाहर का बरामदा शुभम भवन्तु के नाम से जाना जाता है।
हर साल हजारों पर्यटक
जयपुर आने वाले कमोबेश सभी पर्यटक हवामहल जरूर देखने के लिए जाते हैं हवामहल ही जयपुर की पहचान है । पांच मंजिला हवामहल को स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण माना जाता है और हवामहल के बाहरी हिस्से के साथ ही भवन के अंदर से देखने के लिए पर्यटकों में एक रूझान रहता है। हवामहल के रंग को ही जयपुर का गुलाबी रंग का प्रतीत माना जाता है।
Published on:
02 Aug 2018 01:02 pm
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