दुर्लभ बीमारियों के इलाज से जुड़ी राष्ट्रीय नीति को पिछले साल स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी देकर महत्वपूर्ण कदम उठाया था। राष्ट्रीय नीति में दुर्लभ बीमारियों से जुड़े सभी पहुलओं को शामिल किया गया है। जाने माने विशेषज्ञों ने भी इस नीति को बेहद सराहा है, लेकिन अब इस नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर देने की जरूरत है।लोगों में दुर्लभ बीमारियों के प्रति जागरुकता की कमी, डायग्नोस्टिक सुविधाओं का अभाव, रोगी के लिए इलाज की लागत का प्रबंध न कर पाना और चिकित्सकों की ओर से लक्षणों की पहचान न कर पाने जैसी विभिन्न चुनौतियों के कारण राष्ट्रीय नीति की जरूरत महसूस हुई।