
हुब्बल्ली. श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ हुब्बल्ली के तत्वावधान में चातुर्मास के पावन अवसर पर विराजित साध्वी इन्दुप्रभा, डॉ. समीक्षाप्रभा, डॉ. दर्शनप्रभा, दीप्तिप्रभा एवं हीरलप्रभा आदि ठाणा-5 के सान्निध्य में आयोजित प्रवचन सभा श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रही। महावीर भवन का सभागार श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा तथा बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने धर्मश्रवण का लाभ प्राप्त किया। डॉ. समीक्षाप्रभा ने भगवान महावीर के 12 समवसरणों का विस्तृत वर्णन करते हुए बताया कि समवसरण की स्थापना से पूर्व देवलोक के इन्द्र देवताओं के माध्यम से उस स्थान को पवित्र करवाते हैं तथा वैश्रवण कुबेर दिव्य समवसरण की रचना करते हैं। उन्होंने कहा कि समवसरण की 80 हजार सीढियां उसकी दिव्यता और आध्यात्मिक महिमा का प्रतीक हैं। डॉ. दर्शनप्रभा ने कहा कि सत्संग से मिलने वाला सुख संसार के किसी अन्य साधन से प्राप्त नहीं हो सकता। उन्होंने संदेश दिया कि जीवन को निराशा नहीं, बल्कि उत्साह और सकारात्मकता के साथ जीना चाहिए। आगम जीवन के दु:खों को दूर करने वाला अमूल्य मार्गदर्शक है तथा यदि व्यक्ति जीवन में एक भी श्रेष्ठ नियम अपनाए तो उसका संपूर्ण जीवन बदल सकता है। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि संतों का सान्निध्य सम्यक्त्व, साधुत्व और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। साध्वी इन्दुप्रभा ने कहा कि जिनवाणी संसार सागर से पार उतारने वाली, आत्मा को उच्च गति प्रदान करने वाली तथा जन्म-मरण के अनंत चक्र से मुक्ति दिलाने वाली दिव्य वाणी है। जिनवाणी का अध्ययन और आचरण ही मानव जीवन को सफल और सार्थक बनाता है। प्रवचन में विभिन्न मंडलों के सदस्य, सामायिक साधक, संघ की कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आसपास के नगरों और गांवों से भी अनेक धर्मप्रेमी प्रवचन का लाभ लेने पहुंचे। यह जानकारी संघ के अध्यक्ष उकचंद बाफना ने दी।
Updated on:
31 Jul 2026 06:00 am
Published on:
31 Jul 2026 06:00 am
