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राजस्थान हाईकोर्ट में आज 4 लार्जर बेंच, 6 खंडपीठ और 15 एकलपीठ करेंगी सुनवाई, 3 दिन जयपुर में रहेंगे सभी 39 न्यायाधीश

हाईकोर्ट में आज जोधपुर प्रधान पीठ और जयपुर पीठ के सभी 39 न्यायाधीश जयपुर में सुनवाई करेंगे। चार लार्जर बेंच, 6 खंडपीठ और 15 एकलपीठ गठित की गई हैं। जोधपुर के मामलों की सुनवाई वीसी के माध्यम से होगी।
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जयपुर

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Akshita Deora

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Updated: 31 Jul 2026, 6:59 AM IST

Court Order

फाइल फोटो- पत्रिका

हाईकोर्ट में आज जोधपुर प्रधान पीठ और जयपुर पीठ के सभी 39 न्यायाधीश जयपुर में सुनवाई करेंगे। जोधपुर के मामले वीसी से सुने जाएंगे। सुनवाई के लिए तीन-तीन न्यायाधीशों की चार लार्जर बेंच, 6 खंडपीठ व 15 एकलपीठ बनाई गई है। हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश आने वाले तीन दिन तक जयपुर में रहेंगे और यहां शांति मध्यस्थता, विधि का शासन विषय पर शुक्रवार सायं आरंभ होने तीन दिवसीय वैश्विक कांफ्रेंस में शामिल होंगे।

VC के माध्यम से होगी सुनवाई

जोधपुर के मामले सुनने के लिए बनाई गई एक लार्जर बेंच, तीन खंडपीठ व चार एकलपीठ वीसी के माध्यम से सुनवाई करेंगी। जयपुर पीठ में लंबित मामले सुनने के लिए तीन लार्जर बेंच, तीन खंडपीठ व 11 एकलपीठ बनाई गई हैं। लार्जर बेंच जिन मामलों में सुनवाई करेंगी, उनमें जयपुर पीठ परिसर में मनु की मूर्ति लगाने से जुड़ा विवाद भी शामिल है। इस कारण आज की कार्यवाही न्यायिक और प्रशासनिक, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इन विषयों पर लार्जर बेंच करेंगी सुनवाई

लार्जर बेंच के समक्ष कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों पर भी सुनवाई होगी। इनमें सड़क हादसों के मामलों में मिलने वाली दावा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज के कर के दायरे में आने और उस पर बीमा कंपनी द्वारा कर कटौती किए जाने की वैधानिकता का मुद्दा शामिल है। इसके अलावा यह भी तय किया जाएगा कि वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की व्यवस्था की जानी चाहिए या नहीं।

जयपुर स्थित हाईकोर्ट परिसर में मनु की मूर्ति स्थापित किए जाने से संबंधित आचार्य धर्मेन्द्र व अन्य की वर्ष 1989 से लंबित याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी। वहीं पॉक्सो और नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में सजा काट रहे दोषियों को खुली जेल में स्थानांतरित किए जाने की पात्रता और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी लार्जर बेंच विचार करेगी। इन मामलों में होने वाला फैसला भविष्य में समान प्रकृति के प्रकरणों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी नजीर बन सकता है। इन सभी मामलों पर आने वाला निर्णय राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था के साथ-साथ भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई की दिशा और प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।