
जयचंदपुरा गांव में बिना एनओसी बनाया गया एनीकट (पत्रिका फोटो)
Ramgarh Dam News: जयपुर: हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध को पुनर्जीवित करने के लिए किए गए प्रयासों को लेकर टिप्पणी की कि मीटिंग में चाय-बिस्किट खाते हो। नाम लाओ किसके होटल, रेस्टोरेंट, फार्म हाउस और विश्वविद्यालय बांध में पानी आने में रुकावट बने हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि बहाव क्षेत्र में बाधा बने एनीकटों को हटाया जाए और कैचमेंट में सबमर्सिबल पंप नहीं लगने दिए जाएं। कोर्ट ने बांध और उसमें मिलने वाली नदियों को मूल स्वरूप में लाने का प्रयास करने पर जोर दिया।
वहीं, शपथ पत्र के जरिए दो सप्ताह में बांध के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण करने वालों के नाम बताने को कहा। अब 13 अगस्त को सुनवाई होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने गुरुवार को रामगढ़ बांध के मामले में राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार के आधार पर 15 साल पहले स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जयपुर कलक्टर संदेश नायक वीसी के जरिए हाजिर हुए।
कोर्ट ने कहा कि कैचमेंट एरिया में किसके फार्म हाउस हैं, किसके होटल चल रहे हैं, कौन रेस्टोरेंट संचालित कर रहा है। कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, रिपोर्ट में अतिक्रमियों के नाम आने चाहिए।
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अभिनव शर्मा ने कहा कि नदियों का प्राकृतिक बहाव रुकने और अतिक्रमण के चलते पानी रामगढ़ बांध नहीं पहुंच रहा है। बहाव क्षेत्र में कई फार्म हाउस, रिसोर्ट व होटल हैं और एनीकटों के पास मिट्टी जमा हो गई है। इससे बहाव क्षेत्र में पानी का फ्लो नहीं रहता।
इस पर कोर्ट ने जल संसाधन विभाग व अन्य को निर्देश दिया कि विराटनगर से रामगढ़ बांध में मिलने वाली बाणगंगा, ताला, रोड़ा और माधोवेणी नदी के बहाव क्षेत्र से अतिक्रमण हटाए जाएं। कोर्ट ने डॉ. शर्मा से भी कैचमेंट एरिया के बारे में रिपोर्ट देने को कहा।
महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने आमेर के उपखंड अधिकारी का शपथ पत्र पेश कर बताया कि बहाव क्षेत्र में नियम विरुद्ध आवंटन को लेकर 625 रेफरेंस थे, जिनमें से 404 निस्तारित हो चुके हैं और वह जमीन राज्य सरकार के नाम दर्ज हो चुकी है। इसके अलावा रामगढ़ बांध मामले में दो कमेटियां बनी हुई हैं। एक कमेटी की 14 और दूसरी की 17 मीटिंग हो चुकी हैं।
कोर्ट ने शपथ पत्र पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि आगामी सुनवाई पर विस्तृत शपथ पत्र पेश किया जाए, जिसमें यह बताया जाए कि कितने अतिक्रमण हटाए और वे किसके थे। साथ ही टिप्पणी की कि आप लोग कब तक मीटिंग में चाय-बिस्किट खाकर मामले को निपटाते रहेंगे। मौके पर जाकर फिजिकल सर्वे करना चाहिए। सबमर्सिबल से अवैध रूप से भूजल दोहन हो रहा है, जो हर हाल में रुकना चाहिए।
सरकार की ओर से कहा गया कि हम रिमोट सेंसिंग तकनीक से पूरे क्षेत्र का सर्वे करवा लेंगे। अगर हम फिजिकल सर्वे करते हैं तो पक्षपात के आरोप लगते हैं।
Updated on:
31 Jul 2026 07:32 am
Published on:
31 Jul 2026 07:32 am
