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जयपुर में फर्जी कॉल सेंटर: 4000 से ज्यादा लोगों का मिला रिकॉर्ड, ई-मित्र ID और नौकरी दिलाने के नाम पर करते थे ठगी

Rajasthan News: जयपुर पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश करते हुए संचालक समेत 11 लोगों को हिरासत में लिया है। गिरोह ई-मित्र ID और रोजगार दिलाने का झांसा देकर लोगों से 40 से 70 हजार रुपए तक की ठगी कर रहा था।
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People working in a call center

फर्जी कॉल सेंटर का फोटो: पत्रिका

Fake Call Center in Jaipur: जयपुर के जवाहर नगर थाना क्षेत्र की सिंधी कॉलोनी स्थित रॉयल अपार्टमेंट में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने खुलासा किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कॉल सेंटर संचालक सलमान समेत 11 युवक-युवतियों को हिरासत में लिया है। मौके से 15 कंप्यूटर, 2 लैपटॉप और 9 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह राजस्थान सहित कई राज्यों के लोगों को ई-मित्र आइडी दिलाने और उसके माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी कर रहा था।

झांसा देकर ऐंठते थे मोटी रकम

कमिश्नर (स्पेशल) ओमप्रकाश ने बताया कि आरोपी बेरोजगार युवाओं और ई-मित्र सेंटर खोलने के इच्छुक लोगों को निशाना बनाते थे। वे सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापनों और फोन कॉल के जरिए लोगों से संपर्क कर उन्हें भरोसे में लेते थे। इसके बाद ई-मित्र आइडी और रोजगार उपलब्ध कराने का दावा कर उनसे 40 हजार से 70 हजार रुपए तक वसूल लेते थे। रकम मिलने के बाद न तो ई-मित्र आइडी उपलब्ध कराई जाती थी और न ही किसी तरह का रोजगार दिया जाता था। जब पीड़ित आरोपी से संपर्क करने का प्रयास करते, तो उनके फोन बंद मिलते या कॉल रिसीव नहीं की जाती थी।

3 साल से सक्रिय, साइबर पोर्टल पर दर्ज हैं शिकायतें

डीसीपी क्राइम संजीव नैन ने बताया कि यह कॉल सेंटर पिछले दो से तीन वर्षों से संचालित हो रहा था। इसके खिलाफ साइबर क्राइम पोर्टल पर पहले से तीन शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस को आशंका है कि शिकायतों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि कई पीड़ित अब तक सामने नहीं आए हैं।

कार्रवाई के दौरान पुलिस को मौके से 4 हजार से अधिक लोगों का डेटा और रिकॉर्ड मिला है। इन रिकॉर्ड में कई राज्यों के लोगों की जानकारी होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस अब जब्त किए गए कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फोन की तकनीकी जांच कर रही है। साथ ही आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई।

पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से जुड़े किसी बड़े साइबर ठगी नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं। मामले में पूछताछ जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।