
childlessness: माता-पिता बनने की राह हुई आसान: नीलकंठ आईवीएफ
निःसंतानता में दम्पतियों को कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि जीवन में अपूर्णता की भावना, अवसाद और रिश्तों विटघन की स्थिति हो सकती है। भारत जैसे देश में निःसंतानता को एक सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता है और दम्पती को रिश्तेदारों और समाज से कई तरह के ताने झेलने पड़ते हैं। आईवीएफ उपचार के खर्च की अधिकता, विशेषज्ञों की अनुपलब्धता और अच्छे आईवीएफ केंद्रों की कमी के कारण अधिकांश आबादी के लिए आईवीएफ उपचार लेना बहुत मुश्किल है। साथ ही आईवीएफ उपचार लेना कुछ रोगियों के लिए असुविधाजनक हो सकता हैं। आज के समय में ज्यादातर मामलों में टेस्ट-ट्यूब बेबी उपचार अधिक पसंदीदा किया जाता है। डॉ सिमी सूद, डायरेक्टर, सीनियर. कंसलटेंट रिप्रोडक्टिव मेडिसिन एंड फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, नीलकंठ आईवीएफ कहती हैं कि हमारा उद्देश्य देश भर में सबसे अच्छा इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट प्रदान करना है और हम विभिन्न शहरों में ऐसे सेंटर स्थापित करके सभी लोगों के लिए इनफर्टिलिटीट्रीटमेंट को और अधिक सरल बनाना चाहते है। एक सफल इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट और निःसंतान दम्पतियों के माता-पिता बनने के द्वारा परिवारों को जो खुशी मिलती है, उससे अधिक संतुष्टि हमें और कहीं भी नहीं मिल सकती है।
नीलकंठ आईवीएफ पिछले 19 वर्षों में कई गुना विकसित हुआ है । देश के सभी कोनों के लोगों को इनफर्टिलिटीट्रीटमेंट प्रदान करने के लक्ष्य के साथ आज पूरे राजस्थान के उदयपुर, जयपुर और कोटा में आईवीएफ सेंटर के निर्माण के साथ आज तीनों सेंटर पर सभी इनफर्टिलिटीट्रीटमेंट सुविधाएं उपलब्ध है। हमारा पहला फोकस इन फर्टिलिटी मैनेजमेंट है और हम सबसे संभव परिणाम प्रदान करने के लिए नॉनस्टॉप काम कर रहे हैं। नीलकंठ आईवीएफ ने अपने 19 वर्षों सफर में हजारों सफल आईवीएफ किए हैं। शीर्ष भ्रूणविज्ञानियों, डॉक्टर्स और स्टाफ के सहयोग द्वारा बेहतर क्वालिटी और पेशेंट की देखभाल के लिए एनएबीएच पूर्व-मान्यता प्राप्त करने वाला यह राजस्थान का एकमात्र अस्पताल है। नीलकंठ आईवीएफ के डायरेक्टर्स डॉ. सिमी सूद और डॉ. आशीष सूद को दक्षिण राजस्थान में आईवीएफ तकनीक को लाने और इस क्षेत्र में पहले टेस्ट ट्यूब बेबी को जन्म दिलवाने का श्रेय दिया जाता है। इनका लक्ष्य आईवीएफ द्वारा माता पिता बने सफल जोड़ों की संतुष्टि को देखना है और साथ ही साथ जो दंपत्ति अभी तक सफल नहीं हुए हैं, उनके घर में नई खुशियों को जन्म देना है। डॉ. सिमी कहती हैं पिछले 19 साल कठिन रहे हैं, लेकिन हमारे पेशेंट्स की मुस्कान ने इस यात्रा को सार्थक बना दिया है, क्योंकि दुनिया में माता-पिता बनने से बड़ी कोई खुशी नहीं है।
Published on:
26 May 2022 11:35 am
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