
सब्जी बेचकर गुज़ारा करने महिला ने स्कूल को दान में दे दी अपनी जमीन
जयपुर. प्रदेश में सरकारी स्कूलों की काया पलटने में भामाशाह महत्त्वपूर्ण साबित हुए हैं। पिछले एक साल में देशभर से आगे आए 112 दानदाताओं ने 80 करोड़ रुपए दिए, जिससे 2867 स्कूलों की स्थिति सुधारने में काफी मदद मिली है। इन दानदाताओं में कई ऐसे भी हैं, जो अपनी आजीविका ही मुश्किल से चला पा रहे हैं। उन्होंने अपनी पैतृक जमीन बच्चों की शिक्षा के लिए दान दे दी।
शिक्षा विभाग की ओर से 28 जून को जयपुर में होने वाले समारोह में इन भामाशाहों का सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम में 112 भामाशाह और उन्हें प्रेरित करने वाले 44 प्रेरकों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें एक करोड़ से अधिक दान देने वाले 20 भामाशाहों को शिक्षा विभूषण और १५ लाख से एक करोड़ रुपए तक का दान देने वालों को शिक्षा भूषण श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा।
जो कुछ था, सब दान कर दिया
केस- 1
डूंगरपुर जिले की 70 वर्षीय कमला भौंरी ने अपनी करीब 2700 वर्गफीट जमीन राजकीय किशनलाल गर्ग उच्च माध्यमिक स्कूल के लिए दान कर दी। कमला सब्जी बेचकर आजीविका चला रही हैं। उनके 2 बेटे, एक बेटी हैं। वर्ष 2002 में पति की मौत हो चुकी है। परिवार के साथ वह किराए के मकान में रह रही हैं। कमला ने बताया, उनकी जमीन स्कूल के पास ही थी मगर उनके बच्चे स्कूल में नहीं पढ़ पाए। इसलिए जमीन बच्चों के लिए दे दी। स्कूल की जमीन की डीएलसी दर करीब34 लाख रुपए है।
केस - 2
प्रवासी राजस्थानी 80 वर्षीय नैनीचंद तोषनीवाल पिछले 2 दशक से स्कूलों के लिए भवन बनाकर विभाग को दान कर रहे हैं। तोषनीवाल कोलकाता में व्यापार करते हैं। उन्होंने बताया, राजस्थान में घर होने के कारण विशेष लगाव था। इसलिए प्रदेश के बच्चों के लिए स्कूल दान कर रहे हैं। चूरू, नागौर, अजमेर आदि जिलों में वह अब तक 20 स्कूल बना चुके हैं। विभाग पहले जमीन उपलब्ध कराता है, उस पर वह भवन बनाकर देते हैं।
प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक श्यामसिंह राजपुरोहित ने कहा की भामाशाहों ने पिछले साल 62 करोड़ रुपए दान किए थे। इस साल यह राशि बढ़कर 80 करोड़ रुपए हो गई है।
Published on:
21 Jun 2018 12:20 pm
