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omg ठगों से सॉफ्टवेयर से बनाई बॉस की आवाज और फिर हुआ ये

सामने आई दुनिया की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ठगी      

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– ब्रिटिश ऊर्जा फर्म के निदेशक ने सोचा कि वह जर्मन बॉस से कर रहा है बात
– दूसरी बार ठगी की कोशिश हुई नाकाम


जयपुर। तकनीक बढ़ रही है और इसी के साथ बढ़ रही है ठगी की अनोखी वारदातें। अब दुनिया की पहली एआई ठगी यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से ठगी का मामला सामने आया है ब्रिटेन से। एक ब्रिटिश ऊर्जा फर्म के निदेशक को चोरों ने वॉइस इमिटेशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से फोन किया। चोरों ने उसके जर्मन बॉस की आवाज में बात की और लेट पेंमेंट से बचने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए – 240,000 डॉलर- तुरंत अपने एक गुप्त अकाउंट में जमा करवाने के लिए कहा। ब्रिटिश निदेशक का कहना है कि फोन पर जो आवाज उसने सुनी उसमें और उसके बॉस की आवाज में कोई अंतर नहीं था। अपने बॉस के आदेश के अनुसार उसने रुपए उनके गुप्त खाते में जमा करवा दिए। फर्म निदेशक को पहली ठगी का पता तब चला जब ठगों ने दूसरी बार फिर से रुपए ठगने के लिए उसकी बॉस की आवाज में फोन किया, लेकिन इस बार निदेशक दूसरे फोन पर अपने बॉस से ही बात कर रहा था। कंपनी के बीमाकर्ता यूलर हर्मीस का कहना है कि इस तरह की ठगी के बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था। विशेषज्ञों का दावा है कि यह घोटाला दुनिया का पहला सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किया गया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हेइस्ट है।

ठगी का शिकार हुए इस निदेशक का कहना है कि उसे अपने जर्मन बॉस की अकांउट में तुरंत एक करोड़ इकहत्तर लाख रुपए डालने की मांग वैसे तो काफी अजीब लगी। लेकिन आखिरकार वो अपने बॉस का आदेश कैसे टाल सकता था। निदेशक का ये भी दावा है कि ठगों की आवाज ही नहीं, जर्मन लहजा, उच्चारण सब बॉस से मेल खाता था। ऐसे में आवाज में अंतर करना बेहद मुश्किल था।
पुलिस ने फिलहाल पीड़ित कंपनी की पहचान उजागर नहीं की है। कंपनी के बीमाकर्ताओं का कहना है कि यह पैसा हंगरी और मैक्सिको में खातों के माध्यम से भेजा गया था। लेकिन किसी भी खाते से आरोपियों की कोई पहचान नहीं हो पा रही है।

इस मामले के सामने आने के बाद अब दुनियाभर में वॉइस इमिटेशन सॉफ्टवेयर को लेकर बहस शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक का गलत उपयोग हो रहा है।


अब अमरीका के चुनाव पर नजर

ठगी की इस वारदात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब वॉइस इमिटेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक का उपयोग नेताओं की छवि खराब करने के लिए भी किया जा सकता है। हो सकता है कि उनकी आवाज में कुछ ऐसा बोला जाए, जो उन्होंने नहीं बोला है।