जयपुर। एमएनआईटी जयपुर (MNIT Jaipur) के 16वें दीक्षांत समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने कहा कि छात्रों में अपनी शिक्षा के माध्यम से देश में बदलाव लाने का आत्मविश्वास होना चाहिए। अपनी प्रतिभा को भारत की बदलती दृष्टि के सुनहरे युग में योगदान देना चाहिए और भारत को वैश्विक बाजार में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाना चाहिए। दीक्षांत समारोह में कुल 143 डॉक्टरेट डिग्री, 727 स्नातक डिग्री, 582 मास्टर डिग्री और 37 स्वर्ण पदक दिए गए।
मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Malviya National Institute of Technology) के निदेशक प्रो. नारायण प्रसाद पाढ़ी, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ आर.के त्यागी की उपिस्थति में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पंडित मदन मोहन मालवीय के योगदान को याद करते हुए छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाने और संस्थान का नाम रोशन करने का आव्हान किया। बिरला ने कहा कि विश्व में ऐसा कोई अनुसंधान केंद्र नहीं है जहां पर भारतीय का योगदान नहीं हो। छात्रों को नए भारत का भविष्य बताते हुए कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए उनको काम करना होगा। बदलते हुए परिवेश में शिक्षा को उसी के अनुरूप बदला जा रहा है। ताकि चुनौतियों का सामना कर सके। भारतीय छात्र कभी अवसाद में नहीं जाते हैं और समस्या आती है तो उसका समाधान खोजने का प्रयास करते हैं जिसकी वजह से भारतीय छात्रों को पूरी दुनिया में सम्मान पाते है और पूरी दुनिया की अपेक्षा भारत से है। बिरला ने युवाओं को उनके अर्जित ज्ञान को समाज के लिए अर्पित करने का संदेश दिया।
शॉर्टकट से नहीं मिलती सफलता
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आईआईएस विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, भारत की नई शिक्षा प्रणाली की रुपरेखा को रेखांकित करते हुए एनईपी 2020 के निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में काम करने के लिए सभी को प्रेरित किया। उन्होंने स्नातकों को बधाई दी और कहा कि आश्वस्त रहें, चाहे आप कोई भी क्षेत्र चुनें, आप भारत की सशक्त और प्रबुद्ध महिलाएं होंगी जो भविष्य में नेतृत्व करेंगी उन्होंने सभी छात्राओं को सलाह दी कि चैट जीपीटी और इंस्टाग्राम के युग में रहने के बावजूद उन्हें जीवन में शॉर्टकट का पालन नहीं करना चाहिए क्योंकि सफलता आसानी से नहीं मिलती है। उन्होंने छात्रों को कड़ी मेहनत करने, बड़े सपने देखने, खुद से प्रतिबद्धता करने और प्राप्त शिक्षा के साथ न्याय करने के लिए भी प्रेरित किया।