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बच्चों में न हो भेदभाव, शिक्षा को न मानें व्यवसाय और सभी को मिले सरकारी योजनाओं का लाभ

बाल संसद में विद्यार्थियों के साथ हो रहे भेदभावों के खिलाफ तीन संकल्प पारित - स्कूल शिक्षा परिवार ने आयोजित की बाल संसद, निजी विद्यालयों से सैंकड़ों विद्यार्थी हुए शामिल

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जयपुर

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GAURAV JAIN

Oct 08, 2023

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जयपुर. देश-दुनिया में चल रही विभिन्न गतिविधियों पर बच्चों के मन में सवाल कौंधते हैं। वे जवाब चाहते हैं, लेकिन जवाब के बजाय उन्हें डांट दिया जाता है, लेकिन इसके विपरीत माहौल विद्याधर नगर स्टेडियम में आयोजित बाल संसद में देखा गया। इस दौरान नई पीढ़ी के सवालों के उत्तर राज्यसभा सांसद और विभिन्न विभागों से जुड़े विशेषज्ञों ने दिए। कार्यक्रम का आयोजन गैर सरकारी विद्यालयों के संगठन स्कूल शिक्षा परिवार की ओर से किया गया। इसमें सरकारी और निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बीच किए जा रहे भेदभावों के खिलाफ तीन संकल्पों को पारित किया गया।

ये हुए शामिल

एसएसपी अध्यक्ष अनिल शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में बच्चों के साथ शिक्षक, संचालक और अभिभावक सम्मिलित हुए। सेवानिवृत्त न्यायाधीश दीपक माहेश्वरी ने अध्यक्षता की। वहीं राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा राजनीतिक विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए। रिटायर आईएएस जीपी शुक्ला, पूर्व उपनिदेशक सत्येंद्र पवार, मनीष विजयवर्गीय और राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भगवान दास रावत भी उपस्थित रहे। बाल संसद को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।

ये संकल्प हुए पारित

पहला संकल्पः भारतीय संविधान में सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों में भेदभाव करने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः संविधान की भावना के अनुरूप सभी बच्चों को समान मानकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए।

दूसरा संकल्पः सभी भेदभाव वाली योजनाओं के संबंध में बाल संसद का पारित संकल्प पत्र राज्य सरकार को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजा जाए। सरकार की ओर से कार्यवाही न होने पर न्यायालय जाएंगे।

तीसरा संकल्पः शिक्षा सेवा है, इसे व्यवसाय नहीं माना जाए। राज्य सरकार द्वारा शिक्षा को व्यवसाय मानकर लिए जा रहे फैसलों पर उचित कार्यवाही की जाए।

बना वर्ल्ड रिकॉर्ड
बाल संसद में बच्चों की उपस्थिति के आधार पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से विश्व की सबसे बड़ी बाल संसद का अवाॅर्ड दिया गया। विशेषज्ञों ने संबोधन में परोक्ष रूप से कहा कि जो दल बच्चों के संकल्पों को समर्थन देगा उसे ही मत दिया जाए।

बच्चों से ज्यादा अभिभावक और परिजन नजर आए

कार्यक्रम को राजनीतिक रूप देने के भरसक प्रयास किए गए। बच्चों की उपस्थिति काफी संख्या में जरूर थी, लेकिन उन से कहीं अधिक अभिभावक नजर आए।


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