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Thermal Power Plant: राजस्थान में 3200 मेगावाट के नए थर्मल प्लांट लगाने की कवायद तेज, जानें ऊर्जा मंत्री का पूरा प्लान

Solar Energy Target: छबड़ा-कालीसिंध में थर्मल प्लांट लगाने की कवायद तेज, केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री से मांगा सहयोग, चंडीगढ़ में ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Jun 07, 2025

चंडीगढ़ में उत्तर क्षेत्रीय राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन में भाग लेते राजस्थान के ऊर्जा मंत्री। फोटो-पत्रिका।

चंडीगढ़ में उत्तर क्षेत्रीय राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन में भाग लेते राजस्थान के ऊर्जा मंत्री। फोटो-पत्रिका।

Renewable Energy Rajasthan: जयपुर। राजस्थान के ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और भविष्य की योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। यह सम्मेलन केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों ने भाग लिया।

सम्मेलन में नागर ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि कोयला स्रोतों से एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित राज्यों को ‘पिट हेड’ पर ही थर्मल प्लांट लगाने की बाध्यता से छूट दी जाए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि राजस्थान के छबड़ा और कालीसिंध क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रम के अंतर्गत 3200 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट लगाने की अनुमति दी जाए।

उनका कहना था कि यह परियोजना राजस्थान जैसे कोयला स्रोतों से दूर राज्यों के लिए आवश्यक और व्यावहारिक है। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने केंद्र से 1000 मेगावाट की प्रस्तावित परियोजना के अतिरिक्त 5000 मेगावाट की और बैटरी स्टोरेज क्षमता के लिए सहायता मांगी।

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राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 90 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता प्राप्त करने का है। प्रदेश की अनुमानित अधिकतम विद्युत मांग वर्ष 2028-29 तक 26.5 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जिसे पूरा करने के लिए लगभग 18.5 गीगावाट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की आवश्यकता होगी। इसे हर साल 5000 मेगावाट बैटरी स्टोरेज क्षमता जोड़कर प्राप्त किया जा सकता है।

ऊर्जा मंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रदेश को स्टोरेज परियोजनाओं के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ के तहत वित्तीय समर्थन उपलब्ध कराया जाए, जिससे राज्य की ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित दीर्घकालिक योजनाएं साकार हो सकें।

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