16 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ये ऐसे पीएम जो तिरंगा न फहरा पाए

बलिया का बागी और ईमान का अनुरागी। देश की राजनीति के ये वो दो शख्स हैं जो राजनीति के फर्श से फलक तक पहुंचे। प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया लेकिन एक अरमान जो देश के सभी राजनेताओं को होता है, लालकिले के प्राचीर से अपने देश की आन,बान और शान तिरंगे को नमन करने का और फहराने का वह न पूरा हो पाया।

2 min read
Google source verification
gulzari_news.jpg

बलिया का बागी और ईमान का अनुरागी। देश की राजनीति के ये वो दो शख्स हैं जो राजनीति के फर्श से फलक तक पहुंचे। प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया लेकिन एक अरमान जो देश के सभी राजनेताओं को होता है, लालकिले के प्राचीर से अपने देश की आन,बान और शान तिरंगे को नमन करने का और फहराने का वह न पूरा हो पाया।

बात कर रहे हैं दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने गुलजारी लाल नंदा की व बालिया के बागी और युवा तुर्क के रूप में पहचाने रखने वाले चंद्रशेखर। नंदा दो बार प्रधानमंत्री बने। पहली बार वो 27 मई से लेकर 9 जून 1964 तक देश के प्रधानमंत्री और दूसरी बार 11 जनवरी से 24 जनवरी 1966 तक प्रधानमंत्री रहे लेकिन दोनों बार ही 15 अगस्त नहीं आया इसलिए वो लाल किला पर तिरंगा नहीं फहरा पाए।

यह भी पढ़ें : जानिए कांग्रेस और आरएसएस के लिए आखिर क्या है तिरंगा


देश के युवा तुर्क चंद्रशेखर ऐसे दूसरे प्रधानमंत्री रहे जिन्हें लाल किले से तिरंगा फहराने का मौका नहीं मिला। चंद्रशेखर 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। इनके समय मेंअगस्त महीना नहीं आया इसलिए चंद्रशेखर भी लाल किले पर तिरंगा फहराने से चूक गए। यह वो दो प्रधानमंत्री हैं जिनके हिस्से से ये सौभाग्य नहीं आया। नंदा मात्र 13—13 दिन ही प्रधानमंत्री रहे। वह भी नेहरू जी और शास्त्री जी के मृत्यु के बाद।

यह भी पढ़ें : भारत से गायब हो गया नेहरू का पहला तिरंगा

(स्रोत—भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय )