
फन-लविंग 'थॉर': 'लव' में 'चीनी कम', 'थंडर' में गड़गड़ाहट ज्यादा नहीं
आर्यन शर्मा @ जयपुर. मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (एमसीयू) के सुपरहीरोज को लेकर इंडियन ऑडियंस की दीवानगी किसी से छुपी नहीं है। 'थॉर: लव एंड थंडर' एमसीयू की 29वीं पेशकश है। इसमें आकर्षक स्टंट के साथ हास्य का पुट है। इमोशंस का 'उबाल' है तो प्यार की 'मिठास' भी है। वीएफएक्स और सीजीआइ को सलीके से एग्जीक्यूट किया गया है। रोमांच चाय में 'चीनी कम' जैसा है। हंसी-मजाक और एक्शन सीन 'थॉर' को मजेदार तो बनाते हैं, पर ओवरऑल 'शानदार, जबरदस्त, जिंदाबाद...' कहने वाली बात नहीं है।
कहानी में गोर द गॉड बुचर (क्रिश्चियन बेल) ने नेक्रोसॉर्ड से कई 'देवताओं' को मौत के घाट उतार दिया है। अब वह सारे देवताओं का खात्मा करना चाहता है। उसने बड़ी चालाकी से असगर्डियन बच्चों का अपहरण कर लिया है। अब थॉर (क्रिस हेम्सवर्थ) का मिशन बच्चों को वापस उनकी फैमिली से मिलाने का है। इस बीच, थॉर अपने 8 साल पुराने प्यार डॉ. जेन फोस्टर उर्फ 'माइटी थॉर' (नैटली पोर्टमैन) से मिलता है। जेन कैंसर के चौथे स्टेज पर है। वह थॉर के साथ मिलकर बच्चों को बचाना चाहती है। फिर थॉर, माइटी थॉर और वलकैरी (टेसा थॉम्पसन) निकल पड़ते हैं गोर को सबक सिखाने...।
कहानी में नयापन का अभाव है। हिचकोले खाती पटकथा को मजाकिया वन-लाइनर्स और बचकाने चुटकुलों से संभालने की कोशिश की है। निर्देशन पर टाइका की पकड़ मजबूत नहीं दिखती, उन्होंने सिर्फ फिल्म की तेज रफ्तार से ऑडियंस को बहलाने का जतन किया है। बहुत-से ऐसे क्षण आते हैं, जहां लगता है कि कुछ और जोड़ा जा सकता था। न 'लव' दिल को छू पाता है, न ही 'थंडर' गड़गड़ाहट पैदा कर पाता है। यानी निर्देशक फिल्म में 'एहसास' के नए रंग भरने में कामयाब नहीं हो सके हैं। सिनेमैटोग्राफी आकर्षक है। थॉर के रूप में क्रिस हेम्सवर्थ इम्प्रेसिव हैं। हेम्सवर्थ और पोर्टमैन की केमिस्ट्री अच्छी है। उनकी कॉमिक टाइमिंग भी सही है, मगर 'माइटी थॉर' कुछ सीन में 'थॉर' पर हावी रही हैं। बतौर विलेन क्रिश्चियन बेल जबरदस्त हैं, हालांकि उनके किरदार में और गहराई की दरकार थी, जिससे वह और पावरफुल विलेन नजर आते। छोटे से रोल में रसेल क्रो का एक्ट मजेदार है। टेसा थॉम्पसन साधारण लगी हैं। उनके पास करने को कुछ खास नहीं है।
बहरहाल, 2017 में आई 'थॉर: रैग्नारॉक' के साथ सेट की गई आसमानी उम्मीदों पर खरा उतरने में 'थॉर: लव एंड थंडर' की खामियां आड़े आती हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि जो एमसीयू के डेडिकेटेड फैंस हैं, उनके लिए यह एक और 'चैप्टर' की तरह है, उन्हें इसे देख कर शायद ही 'झुंझलाहट' आए, मगर यह नए फैंस जुटाने में कामयाब नहीं होगी।
Published on:
07 Jul 2022 09:56 pm
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