
हरियाणा बॉर्डर से फतेहपुर तक तीन एसडीएम मुख्यालय, किसी को नहीं दिखे मजबूर मजदूर
फतेहपुर (सीकर). मजदूरों की राहत के दावे कदम-कदम पर जमींदोंज होते नजर आ रहे हैं। पिछले दो दिन से दिल्ली से लेकर राजस्थान की सरकार दावा कर रही है कि यदि कहीं मजदूर पैदल जाते हुए दिखें तो संबंधित एसडीएम उनकी व्यवस्था करें, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। रविवार को हरियाणा से145 किमी का सफर पैदल तय कर मजदूर फतेहपुर तक पहुंच गए, लेकिन मजदूरों के जो हालात दिखे वे द्र्रवित करने वाले थे। तपती दोपहरी में चालीस डिग्री पारे में सिर पर सामान का बोझ तो गोद में बच्चे...। पैरों में छाले और टूटी चप्पलों से जद्दोजहद...। कुछ ऐसा ही दर्द था रविवार दोपहर जयपुर-बीकानेर हाईवे पर पैदल आते मजदूरों का । बच्चों को भूख लगी तो मां ने हाईवे किनारे लकड़ी जलाई आटे को पानी में गंूथकर आग में डाल बाटी बना दी।
रोजगार छिना, भूख से तड़पने को मजबूर
दस मार्च को झालावाड़ के निपान्या कालू गांव से हरियाणा के डेरा बस्ती में परिवार अपने पालतू जानवरों के साथ दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के लिए गए थे। परिवार के सदस्य अंबाला में खेतों मे गेहू निकालने का काम करते थे। लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया। जब निकलने की कोई व्यवस्था नहीं हुई तो पैदल ही चल पड़े। इन मजदूरों के हरियाणा बॉर्डर से फतेहपुर तक के सफर में तीन एसडीएम मुख्यालय आए, लेकिन किसी की इन पर नजरें नहीं पड़ी।
स्थानीय लोगों ने चप्पल व राशन दिलाया
मजदूरों के पैदल आने की बात सामने आने पर क्षेत्रवासी वहां पहुंचे। इस परिवार के लिए कायम रसोई से खाने की व्यवस्था कराई। इसके बाद सामाजिक संस्था बीएल सिंघानिया संस्था की ओर से राशन के किट दिलवाए। सभी को नई चप्पल दिलवाई।
भामाशाह के सहयोग से करा रहे व्यवस्था
सरकार के आदेशानुसार जनसहयोग से ही मजदूरों को भेजा जाएगा। व्यवस्था होने तक इन्हें एक स्कूल में रखकर दोनों समय का खाना पहुंचाया जाएगा।
-शीलावती मीणा, एसडीएम, फतेहपुर
Published on:
18 May 2020 12:28 am
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