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पावर बाइक पर सवार 3 किशोरों ने आधी रात 6 थाना इलाकों में मचाया आतंक, सोती रही पुलिस

लूट की 9 वारदातों के बाद जागी पुलिस, फिर भी एक ही आया पकड़ में, बाद में शेष 2 को धरा
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जयपुर. शहर में रविवार रात बाइक सवार 3 किशोरों ने जमकर आतंक मचाया। शहर में आमजन की सुरक्षा और पुलिस की व्यवस्था का मखौल उड़ाते हुए 6 थाना इलाकों में लूट की एक-दो नहीं बल्कि सिलसिलेवार 9 वारदातें कीं। रास्ते में जहां भी मौका मिला, लोगों से मोबाइल फोन लूट लिए। पुलिस को पहली वारदात के बाद ही सूचना मिल गई लेकिन पुलिस सतर्क नहीं हुई। बाइक सवार इन लुटेरों ने रात करीब 12 बजे आतंक मचाना शुरू किया। पानीपेच, पोलोविक्ट्री, स्टेच्यू सर्कल, इमलीवाला फाटक, गोपालपुरा, रिद्धि-सिद्धि चौराहा, गांधीनगर रेलवे स्टेशन, एमडी रोड व एमआइ रोड पर वारदात की। आखिर टीपी नगर में आरोपियों को पुलिस बमुश्किल पकड़ सकी।

एक दर्जन मोबाइल फोन किए बरामद
पुलिस ने बताया कि आरोपी किशोर ब्रह्मपुरी व नाहरगढ़ थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। तीनों पावर बाइक पर सवार थे। पुलिस ने तीनों को निरुद्ध किया है। उनसे दर्जनभर मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

भागने का किया प्रयास
टीपी नगर पुलिस को सूचना मिली कि लुटेरे उनके इलाके में घुस गए हैं। इस पर रात्रि गश्त में तैदात थानाधिकारी रेवड़मल, एएसआइ हबीब खान, कांस्टेबल अजीत व ड्राइवर जितेन्द्र ने गुरुद्वारा मोड़ पर मोर्चा संभाला। लुटेरों से मिलते-जुलते हुलिए वाले किशोर सामने आते ही पुलिस ने पीछा शुरू किया। बाइक सवार लुटेरे दिल्ली रोड की तरफ मुड़ गए। करीब 100 मीटर दूर चलने के बाद पुलिस ने डिवाइडर से सटाकर जीप खड़ी की और आरोपियों को रोका। एक आरोपी को तो वहीं पकड़ लिया लेकिन 2 भाग छूटे। फिर सिग्मा व अन्य वाहनों के जरिए पुलिस ने आजादनगर व ट्रांसपोर्टनगर में सर्च कर दोनों को भी पकड़ लिया।

एक के बाद एक वारदात
पुलिस के मुताबिक पहली वारदात करीब 12 बजे पानीपेच के पास हुई थी। उसके बाद करीब 1.30 घंटे तक वह आधे शहर में घूमते रहे। ज्योतिनगर, बजाजनगर, मोतीडूंगरी थाना इलाकों में उन्होंने कुल 9 वारदातों को अंजाम दिया।


पुलिस की व्यवस्था पर बड़ा सवाल
शहर के कई थाना इलाकों में किशोरवय लुटेरे एक के बाद एक वारदात करते गए। वायरलैस बजते रहे और एक के बाद एक सूचना मिलती रही। इसके बावजूद पुलिस 9 वारदातें करने के बाद उन्हें पकड़ पाई। जिस थाना इलाके में वारदात हुई, वहां की पुलिस को तुरंत सूचना पहुंच गई लेकिन न तो नाकाबंदी कारगर रही और न अभय कमांड के कैमरों के जरिए उन्हें देखने का प्रयास किया गया। न किसी अन्य थाना पुलिस या नाकाबंदी प्वाइंट से आरोपियों का पीछा किया गया।