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जयपुर। टिड्डी के आउटब्रस्ट होने से भारत ने पाकिस्तान व ईरान के साथ मिलकर जाइंट ऑपरेशन करने का प्रस्ताव रखा है ताकि तीनों देश एक दूसरे के साथ टिड्डी की रियल टाइम लोकेशन, तकनीक व अन्य संसाधन शेयर कर सकें।
ईरान की इस पर सहमति है लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। भारत ने ईरान को पेस्टीसाइड मैलाथिन देने का भी प्रस्ताव रखा है। पाकिस्तान टिड्डी छिड़काव का पेस्टीसाइड नहीं बनाता है लेकिन उसने चीन से 3 लाख लीटर पेस्टीसाइड मंगाया है। पिछले साल भी पाक में 20 दिनों तक पेस्टीसाइड नहीं था जिसके कारण कई टिड्डी भारत आ गए थे।
दक्षिण एशिया में टिड्डी से प्रभावित देश ईरान, पाकिस्तान व भारत है। खाड़ी देश यमन, ओमान व स्वेज नहर के दोनों ओर बसे देश और पूर्वी अफ्रीका से टिड्डी सीधी ईरान के दक्षिणी हिस्से में आती है जहां अ'छी खासी बरसात होने से वनस्पति मिल जाती है। यहां से पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में घुसकर सिंध होते हुए राजस्थान के बॉर्डर से भारत में प्रवेश करती है। वर्तमान में ईरान के दक्षिणी हिस्से व ब्लूचिस्तान में टिड्डी ने बड़ी संख्या में अण्डे दिए हैं। इससे तीनों देशों की वनस्पति और कृषि पर संकट खड़ा हो गया है।
- टिड्डी लगभग उसी रुट से आगे बढ़ रही है, जिस रुट पर वह पिछले साल थी। वह अपने सेंसर से वनस्पति की पहचान कर लेती है।
डॉ. केएल गुर्जर, उप निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन
Published on:
25 May 2020 11:16 pm
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