
Tiger T42 won the battle after the struggle, the tigress made T99 his
जयपुर
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (Ranthambore National Park)में बाघिन के लिए बाघों में हुए आपसी संघर्ष के बाद बाघ टी 42 ने जंग जीत ली है। लंबे संघर्ष के बाद बाघ टी 42 फतेह ने बाघिन टी 99 को अपना बना लिया है। जिस कारण से अब उद्यान में इन दिनों बाघ टी 42 और बाघिन टी 99 का नया जोड़ा बन गया है। इन दिनों रणथम्भौर के बाघ बाघिनों की लगातार साइटिंग हो रही है। इस दौरान ही इन दोनों का एक नया जोड़ा देखने को मिला रहा है।बाघिन टी 99 को अपना बनाने के लिए बाघ टी-42 को काफी संघर्ष करना पड़ा था। रणथंभौर के जोन-10 में बाघ टी-42 और टी-109 बाघिन के चक्कर में भिड़ गए थे। काफी देर तक हुए इस संघर्ष में बाघ टी-109 गंभीर घायल हो गया था। जबकि संघर्ष के बाद टी-42 वहां से चला गया। इस संघर्ष में बाघ टी-109 को हराकर बाघ टी 42 फतेह ने बाघिन टी 99 अपना बना लिया हैं।
ताकतवर बाघ बनाता है बाघिन को अपना
रणथंभौर नेशनल पार्क में लगातार बाघों की बढ़ती संख्या अब बाघों के लिए ही खतरा साबित हो रही है। पार्क में बढ़ती बाघों की संख्या के कारण कई बाघ अपनी टैरेटरी नहीं बना पा रहे हैं और इसी के चलते रणथंभोर नेशनल पार्क में आए दिन बाघों के बीच आपसी संघर्ष हो रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों की माने तो नियमानुसार एक बाघ पर पर तीन बाघिन का होना जरूरी होता है। जंगल में बाघ की टेरेटरी बाघिन की अपेक्षाकृत तिगुनी मानी जाती है, लेकिन रणथम्भौर में वर्तमान में एक बाघ पर तीन बाघिन नहीं होने के कारण बाघों में आपसी संघर्ष की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। यहीं कारण है कि बाघिन को लेकर बाघों में आपसी संघर्ष होता है। जिसमें बाघों का जान तक गंवानी पड़ रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघिन को पाने के लिए और उसे इम्प्रेस करने के लिए बाघों में आपस में झगड़ा होता हैं। इस झगड़े में जो बाघ ज्यादा ताकतवर होता है वह जंग जीत लेता है और बाघिन को अपना बना लेता है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रणथम्भौर में वर्तमान में क्षमता से अधिक बाघ हैं। रणथंभौर में 1392 बफर जोन और 392 कोर एरिया है। इस लिहाज से यहां 40 बाघों को ही रखा जा सकता हैं। लेकिन यहां क्षमता से कहीं अधिक 70 से अधिक बाघ रह रहे हैं।
Published on:
09 Feb 2020 10:26 am
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