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अहमदाबाद अधिवेशन में क्यों छाए टीकाराम जूली? ‘अपमान’ को कांग्रेस ने बनाया राष्ट्रीय मुद्दा; BJP की बढ़ी टेंशन

Rajasthan Politics: गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि दलित अस्मिता के प्रतीक के तौर पर उभरे।

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Tikaram Jully

Rajasthan Politics: गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि दलित अस्मिता के प्रतीक के तौर पर उभरे। क्योंकि टीकाराम जूली के मंदिर में जाने के बाद ‘गंगाजल से शुद्धिकरण’ जैसे अपमानजनक कृत्य को कांग्रेस ने भाजपा की दलित विरोधी सोच करार दिया।

दरअसल, टीकाराम जूली ने रामनवमी के अवसर पर अलवर के एक मंदिर में दर्शन किए थे। दर्शन के बाद बीजेपी से निलंबित नेता ज्ञानदेव आहूजा ने मंदिर में गंगाजल से शुद्धिकरण करवाया। ज्ञानदेव आहूजा की इस हरकत को कांग्रेस ने दलित समाज की भावनाओं के साथ जोड़कर भाजपा पर खूब निशाना साधा।

अधिवेश में इस मुद्दे पर हुई खूब चर्चा

बता दें कि, अहमदाबाद अधिवेशन के मंच से कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को दलित अपमान का प्रतीक बताते हुए भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को सीधी चुनौती दी। राहुल गांधी ने अपने भाषण में स्पष्ट कहा कि अगर किसी दलित के मंदिर जाने पर वहां गंगाजल से शुद्धिकरण करवाया जाता है, तो यह धर्म नहीं, मनुवादी सोच है। कांग्रेस इसका विरोध करती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा मंदिर में दलितों को नहीं चाहती। वे पूजा करने के बाद शुद्धिकरण करवाते हैं। यह हमारा सनातन धर्म नहीं है। हमारा धर्म किसी से भेदभाव नहीं सिखाता। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अपने भाषण में इस मुद्दे को उठाया और टीकाराम जूली का नाम मंच से लिया, जिससे यह साफ हो गया कि कांग्रेस अब दलित सम्मान को अपने चुनावी अभियान का केंद्र बनाने जा रही है।

जूली के जरिए नया राजनीतिक संदेश

गौरतलब है कि राजस्थान में कांग्रेस जूली के ‘अपमान’ को लेकर पहले ही भाजपा पर हमलावर रही है, लेकिन अब इसे राष्ट्रीय नैरेटिव में बदल दिया है। टीकाराम जूली के पक्ष में जिस तरह कांग्रेस खड़ी हुई है, उसका दलित समाज पर बड़ा असर दिख सकता है। जूली की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि उन्हें मंच पर बैठाकर दलितों के अधिकारों का चेहरा बनाया गया।

ऐसे में यह मामला अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में दलित समुदाय की भारी उपस्थिति को देखते हुए कांग्रेस इसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकती है। विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस बिहार चुनावों में जातीय सम्मान और दलित उत्पीड़न जैसे मुद्दों को उठा सकती है।

वहीं, यह प्रकरण भाजपा के खिलाफ देशभर में नया मुद्दा बन सकता है, खासकर जब वह खुद को ‘सबका साथ, सबका विकास’ की पार्टी बताती है।

गंगाजल छिड़कना शर्म की बात- खरगे

इससे पहले राष्ट्रीय अधिवेश में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा था कि हमारा LOP रामनवमी पर मंदिर में गया, भगवान के दर्शन किए, जब वो वापस आया उसके बाद मंदिर में गंगाजल छिड़का गया ये शर्म की बात है…अगर एक LOP के साथ ये हुआ तो देहात में रहने वाले दलित के साथ क्या होता होगा? क्या दलित हिंदू नहीं है क्या?

यह भी पढ़ें : गुजरात में गूंजा ‘अलवर’ का मुद्दा, मंदिर को गंगाजल से धोने पर खरगे को आया गुस्सा; पूछा- क्या दलित हिंदू नहीं है?

क्या है मंदिर धोने का पूरा विवाद?

बताते चलें कि रामनवमी के दिन अलवर की एक सोसायटी स्थित श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन हुआ था। इस कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी शामिल हुए और मंदिर में पूजा-अर्चना की। लेकिन, अगले ही दिन ज्ञानदेव आहूजा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंदिर में अपवित्र लोग आ गए थे, इसलिए हमने गंगाजल से शुद्धिकरण किया है।

इसके चलते भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। भाजपा प्रदेश संगठन ने ज्ञानदेव आहूजा को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी की मूल विचारधारा और अनुशासन का उल्लंघन किया है।

यहां देखें वीडियो-