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विश्वेश्वर महादेव मंदिर में है शहर के दूसरे वैकुंडनाथ का मंदिर

-सोडाला के सैकड़ों साल पुराने मूर्ति की डमी बनाकर दिया रूप

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जयपुर

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Vikas Jain

May 14, 2018

Old dummy idiom

हरि मार्ग. विश्वेश्वर शिव मंदिर और वैकुण्डनाथ धाम का नाम की गिनती प्राचीन मंदिरों में की जाती है। श्री वैकुण्डनाथ भगवान का दूसरा मंदिर टोंक रोड, गट्टे वाले बाबा, हरीमार्ग सुभाष नगर-२ में स्थित है। जबकि पहला एकमात्र मंदिर सोडाला में है, जिसकी कॉपी कर कारीगरों के अथक प्रयासों से ८ साल पहले मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। आज भी मंदिर में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और पूजा पाठ करते हैं। मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ कार्तिक महीने में होती हैं जबकि हर चौदस पर महिलाएं भजन-गायन करती हैं।

३० वर्ष पूर्व मात्र चबूतरे पर था हनुमान मंदिर
मंदिर के संरक्षक राधावल्लभ बंग बताते हैं कि पहले यहां सिर्फ हनुमानजी का चबूतरा था। यहां लोगों में प्रगाढ़ श्रद्धा थी। धीरे-धीरे मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया और लोगों के प्रयासों से शिव मंदिर का निर्माण हुआ। स्थानीय निवासियों में डिमाण्ड थी कि यहां वैकुण्ड भगवान की मूर्ति की स्थापना की जाएं। वे लोग नियमित रूप से कारीगरों को सोडाला मंदिर लेकर जाते और मूर्ति निर्माण करवाते। कुछ महीनों में मेहनत रंग लाई। करीब ८ साल पहले नारायणदासजी महाराज ने मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पहली रसीद काटी। जबकि बस्सी के महंत ने मूर्ति की स्थापना करवाई। ऐसा माना जाता है कि भगवान वैकुण्डनाथ जी का जन्म शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था। इसलिए प्रत्येक चौदस को भक्त यहां पूजा-पाठ और भजन गायन करते हैं। मंदिर में हर चौदस को महिलाएं प्रभु की परिक्रमा करती हैं और दान-पुण्य करती हैं।

समिति के सहयोग से हुए अनेक कार्य
मंदिर में ट्रस्ट भी बना हुआ है। अध्यक्ष बृजमोहन शर्मा बताते हैं कि ट्रस्ट बनने से मंदिर की सभी सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहती हैं। हर तीन साल में चुनाव करवाएं जाते हैं और संविधान के अनुसार ही ट्रस्ट कार्य करता है। मंदिर में वाटर कूलर, मेडिकल कैंप, भागवत कथा, नानी बाई को मायरो, राम कथा, खाटू श्यामजी के भजन, कृष्ण और राम जन्मोत्सव मनाया जाता है। मंदिर में दो पुजारियों की व्यवस्था की हुई है। मंदिर के पट सुबह ५ बजे खुल जाते हैं जबकि संध्या में ९ बजे बंद होते हैं। मंदिर में नारायणदास जी महाराज, राम बालक दास जी महाराज, वृंदावन से रामकल्याण दास जी महाराज आदि का आगमन हो चुका है। मंदिर की सभी व्यवस्थाएं जैसे पंखे, लाइट, सफाई, पानी, आदि ट्रस्ट की ओर से ही देखी जाती है।