
शादाब अहमद/जयपुर. सरकार ने वन विभाग में तबादले कर हलचल मचा दी है। पिछले दो साल के दौरान रणथंभौर, सरिस्का और मुंकुदरा टाइगर रिजर्व को लेकर कई विवाद हुए। भाजपा शासन के समय तीन टाइगर रिजर्व को विदेशी कंपनी को देने का प्रस्ताव तक आ गया था, जिस पर सरकार को बैकफुट पर जाना पड़ा था। इसके बाद सरिस्का में बाघ का शिकार, रणथंभौर में बाघों की लगातार मृत्यु, वन क्षेत्रों में बघेरों की मृत्यु और पश्चिमी राजस्थान में गोडावण के लुप्त होने के कगार पर पहुंचने से वन विभाग सवालों के घेरे में खड़ा हो गया।
सत्ता बदलने के साथ हालात बदले और अब वाइल्ड लाइफ के मुखिया पद से चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जी.वी.रेड्डी की विदाई हो गई। उनकी जगह कनिष्ठ अफसर अरिंदम तोमर पर भरोसा जताया है। सरकारी सेवा में आने के बाद करीब 20 साल रणथंभौर में गुजारने वाले वाइकेसाहू को भी वहां से हटा दिया है। फिलहाल वह पांच साल से इस टाइगर रिजर्व में मुख्य वन संरक्षक के पद पर थे।
मुश्किलों से जूझ रहे टाइगर रिजर्व
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में उपलब्ध क्षेत्र के अनुपात में अधिक संख्या में बाघ हो गए हैं। बाघों के पीछे शिकारियों के लगने की आशंका से भी अफसर इन्कार नहीं कर रहे हैं। उधर, सरिस्का में पिछले दो साल के दौरान शिकारियों की घुसपैठ के चलते बाघों के शिकार का खतरा बना हुआ है। पिछले साल एक बाघ का शिकार भी कर चुके हैं। पिछले एक साल के दौरान सबसे अधिक विवाद मुकुंदरा टाइगर रिजर्व को लेकर हुआ। यहां बाघों की शिफ्टिंग को लेकर वन विभाग और एनटीसीए भी आमने-सामने हो चुके हैं। हाईकोर्ट तक मामला भी पहुंचा।
बघेरों की मौत
तीन साल में बघेरों की मौत भी बड़ी संख्या में हुई। इसके साथ ही जंगलों में अतिक्रमण बढऩे से आबादी बढ़ी और बघेरों का लोगों से संघर्ष भी बढ़ा। अकेले 2018 में ही 46 बघेरों की मृत्यु हो गई। कुछ इलाकों में बघेरों की शिकार की घटनाएं भी हुई हैं।
Published on:
28 Jan 2019 10:51 am
