
जयपुर। कोयला प्रबंधन में फेल होने के बाद बिजली महकमा अब ट्रांसफार्मर की कमी से जूझ रहा है। जयपुर डिस्कॉम में सिंगल फेज में 25 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर ही नहीं है। इससे खराब ट्रांसफार्मरों को निर्धारित अवधि में बदलने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डिस्कॉम प्रशासन को ऐसे हालात में अब दो अलग—अलग क्षमता 16 व 10 केवीए के ट्रांसफार्मर लगाने के आदेश जारी करने पड़े हैं। बताया जा रहा है कि जितने ट्रांसफार्मर की जरूरत है, उसके अनुपात में आ ही नहीं रहे। जबकि, पहले ही आकलन कर लिया जाता है कि आगामी छह से बारह में कितने संसाधन की जरूरत पड़ेगी। इसी आधार पर खरीद होती है, लेकिन इस मामले में अफसर फेल रहे हैं। जयपुर डिस्कॉम में 13 जिले शामिल हैं।
यह दे रहे तर्क : डिस्कॉम में एमएम विंग के अफसरों ने ट्रांसफार्मर की कमी तो स्वीकारी, लेकिन ज्यादा दिक्कत नहीं होने की बात कहकर बचाव भी करते रहे। उनका तर्क है कि हर माह करीब 100 सिंगल फेज ट्रांसफार्मर की जरूरत पड़ती है और अभी 40 का बैकलॉग चल रहा है। इस बैकलॉग को भी पूरी तरह खत्म करने पर काम चल रहा है। दो अलग—अलग कम क्षमता के ट्रांसफार्मर लगने से छीजत में कमी आने का तो दावा कर रहे हैं, लेेकिन इसकी कीमत में अंतर की स्थिति साफ करने से भी बचते रहे।
संकट है, क्योंकि 50 फीसदी कटौती कर चुके
घाटे से जूझ रही बिजली कंपनियों के अधिकार और खर्चों पर कैंची पहले ही चलाई जा चुकी है। अगले तीन माह के लिए मेटेरियल खरीदी के नए ऑर्डर स्थगित कर दिए गए। साथ ही संचालन एवं रखरखाव (ओ एण्ड एम) के खर्च में भी 50 फीसदी की कटौती कर दी गई। विशेष परिस्थितियों में डिस्कॉम्स को खरीद आॅर्डर देने होंगे तो भी इसके लिए डिस्कॉम्स के चेयरमेन से अनुमति लेनी होगी। वित्तीय संकट के चलते ऐसा किया गया है। बिजली कंपनियों का घाटा 86 हजार करोड़ को पार कर गया है।
सीएम, मंत्री दे चुके निर्देश
मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री दोनों लंबित कृषि कनेक्शन जारी करने और खराब ट्रांसफार्मर बदलने को लेकर लगातार निर्देश देते रहे हैं। कृषि कनेक्शन जारी करने के दौरान भी कई जगह नए ट्रांसफार्मर लगाने की जरूरत पड़ती है।
Published on:
11 Sept 2021 07:29 pm
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