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टैक्स के जरिए सरकार भर रही खजाना, गोशालाओं की आस अधूरी

गो संवर्धन व संरक्षण (Cows Promotion and Protection) के लिए जमीनों की रजिस्ट्री व शराब (Registry and Alcohol) पर अधिभार (Surcharge) लगाकर सरकार ने अपना खजाना (Treasure) तो भर लिया, लेकिन प्रदेश के गोशाला (Cow shed) संचालकों की वर्षों पुरानी मांग आज भी अधूरी है।

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जयपुर

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vinod saini

Aug 25, 2020

टैक्स के जरिए सरकार भर रही खजाना, गोशालाओं की आस अधूरी

टैक्स के जरिए सरकार भर रही खजाना, गोशालाओं की आस अधूरी

सीकर। गो संवर्धन व संरक्षण (Cows Promotion and Protection) के लिए जमीनों की रजिस्ट्री व शराब (Registry and Alcohol) पर अधिभार (Surcharge) लगाकर सरकार ने अपना खजाना (Treasure) तो भर लिया, लेकिन प्रदेश के गोशाला (Cow shed) संचालकों की वर्षों पुरानी मांग आज भी अधूरी है। सरकारी खजाने में पिछले दो वर्ष में स्टाम्प ड्यूटी (Stamp duty) व शराब पर लागू वैट (VAT applied to alcohol) के अधिभार से लगभग 1252 करोड़ आए हैं, लेकिन सरकार ने प्रदेश की पंजीकृत 2870 गोशालाओं को महज 645.79 करोड़ अनुदान का ही भुगतान किया है। गोशाला संचालकों का कहना है कि सरकार की ओर से कोरोनाकाल में भी पूरे साल का अनुदान नहीं दिया जा रहा है।
किस श्रेणी पर कितना अधिभार
सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी पर दस प्रतिशत व शराब पर 20 फीसदी वैट अधिभार गोशालाओं के नाम पर लगाया। वर्ष 2018-19 में स्टाम्प ड्यूटी अधिभार से 266 करोड़, वर्ष 2019-20 में 291 करोड़ का राजस्व मिला। इसी तरह शराब पर लागू वैट अधिभार से वर्ष 2018-19 में 536 करोड़ व वर्ष 2018-20 में 716 करोड़ का राजस्व प्राप्त हआ।

यह दी जाती है सहायता
सरकार की ओर से गोशालाओं को गोवंश की संख्या के आधार पर अनुदान दिया जाता है। वर्तमान में बड़े गोवंश के लिए 40 रुपए प्रतिदिन व छोटे गोवंश के लिए प्रतिदिन 20 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। यह सहायता राशि अधिकतम 180 दिनों के लिए दी जाती है।

नई गोशाला भी नहीं हो रही पंजीकृत, सर्वे के नाम पर खानापूर्ति
प्रदेश में गोसेवा के लिए लगातार सामाजिक संस्थाएं आगे आ रही हैं। गोशाला संचालन करने वाली समितियों का कहना है कि जिला कलेक्टर सहित अन्य एजेंसियों के जरिए कई बार आवेदन किया गया, लेकिन पंजीयन के नाम पर टरकाया जा रहा है। इधर, गोपालन विभाग की ओर से हर साल भौतिक सत्यापन के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। लोगों का कहना है कि आवेदनों को जमीन की कमी सहित अन्य मापदंडों के आधार पर रद्द किया जा रहा है।

फैक्ट फाइल
प्रदेश में कितनी गोशाला पंजीकृत: 2870
2 साल में गोशालाओं को अनुदान: 645.79 करोड़
स्टाम्प ड्यूटी व शराब विक्री अधिभार से आया राजस्व: 1252 करोड़
गोशालाओं में गोवंश: 9.50 लाख से अधिक
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प्रदेश में कहां कितनी पंजीकृत गोशाला
अजमेर: 40
टोंक: 33
भीलवाड़ा: 49
कुचामन सिटी: 226
नागौर: 343
भरतपुर: 16
धौलपुर: 10
करौली: 12
सवाईमाधोपुर: 17
बीकानेर: 155
चूरू: 188
हनुमानगढ़: 206
श्रीेगंगानगर: 105
जयपुर: 135
दौसा: 13
अलवर: 48
सीकर: 218
झुंझुनूं: 122
जोधपुर: 189
जैसलमेर: 111
बाड़मेर: 79
जालौर: 127
पाली: 204
सिरोही: 39
कोटा: 24
बूंदी: 20
बारां: 24
झालावाड़: 34
उदयपुर: 17
बासवाड़ा: 10
चित्तौडगढ़: 31
डूंगरपुर: 3
प्रतापगढ़: 8
राजसमंद: 14
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हमारी लंबे समय से मांग है कि गायों के लिए अनुदान नौ महीने का दिया जाए। अभी आपदा का समय है, इसलिए 12 महीने का अनुदान सरकार को देना चाहिए। आवारा पशुओं की समस्या बहुत भारी है, इसके लिए सरकार को नंदीशाला की घोषणा को तत्काल धरातल पर लाना होगा। सरकार के पास बजट की कोई कमी नहीं है।

-दिनेश गिरी महाराज, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान गोसेवा समिति