
विधि आयोग अध्यक्ष न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी (फोटो-पत्रिका)
जयपुर। विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और सोशल मीडिया की चुनौतियों को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि जब हर तरफ शोर होता है, तो उसी शोर में सत्य दब जाता है। ऐसे में सजग रहकर अफवाह, अधूरी जानकारी और एल्गोरिदम से उपजे भ्रम से सत्य को बचाए रखने की जरूरत होती है। उन्होंने चेताया कि मशीन सहायक हो सकती है, लेकिन सोचने, परखने और सही दिशा तय करने का दायित्व मानव विवेक का ही है। उन्होंने संविधान को जनता का दस्तावेज बनाने में पत्रकारों की प्रमुख भूमिका बताई, वहीं भारत को नक्शे पर खींची लाइन के बजाय एक सभ्यता नाम दिया।
न्यायाधीश माहेश्वरी ने रविवार को जयपुर में राजस्थान पत्रिका की ओर से आयोजित 35वें पं. झाबरमल्ल शर्मा स्मृति व्याख्यान एवं सृजनात्मक साहित्य व पत्रकारिता पुरस्कार समारोह को संबोधित किया। पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी, पं. शर्मा के परिजनों की मौजूदगी में न्यायाधीश माहेश्वरी व पत्रिका समूह के डिप्टी एडिटर भुवनेश जैन ने सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार के विजेताओं को सम्मानित भी किया।
न्यायाधीश माहेश्वरी ने समाज को भ्रमित करने वाले शोर को आज की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि केवल शंखनाद ही शोर नहीं है, कई बार फुसफुसाहट भी शोर का काम करती है। भीड़, अफवाह, अधूरी जानकारी और एल्गोरिदम से उपजा भ्रम भी शोर का हिस्सा है। आधी-अधूरी वायरल सूचनाएं व तकनीकी एल्गोरिदम लोकतंत्र को प्रभावित करने लगे हैं। ऐसे में सत्य की रक्षा करना पत्रकारिता और साहित्य का सबसे बड़ा धर्म है।
न्यायाधीश माहेश्वरी ने पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ कहे जाने को लेकर कहा कि पत्रकारिता विचारों का सेतु है, जैसा कि पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी भी कहते हैं। उन्होंने कहा, आज ‘काइंडनेस’ से जुड़े दृश्य सिखाते हैं कि भलाई किसी सौदे का विषय नहीं है। किसी को ध्यान से सुन लेना भी बड़ी मानवीय सेवा है।
न्यायाधीश माहेश्वरी ने कहा कि भारत केवल नक्शे पर खींची रेखाओं का नाम नहीं है, बल्कि एक सभ्यता है। रामायण का जिक्र कर कहा कि जिस तरह भरत ने शासन त्यागने का साहस दिखाया, वह बड़ी बात है। साथ ही कहा कि हमने सदैव पीड़ितों को अपनाया और सभी धर्मों का आदर कर उन्हें सत्य माना, यह भी एक बड़ी बात है।
न्यायाधीश माहेश्वरी ने कहा कि संविधान मात्र कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि बंधुत्व का जीवंत ग्रंथ है और समाज को जोड़ने वाला एक जीवित पुल। डॉ. बी आर आंबेडकर ने संविधान में एक नया मूल्य जोड़ा -बंधुत्व। इसके बिना समानता और स्वतंत्रता अधूरी हैं। उन्होंने मेघालय के ‘लिविंग रूट ब्रिज’ का उल्लेख कर कहा कि समय के साथ यह मजबूत होता जाता है, जिस तरह भारतीय संविधान विकसित होता रहा है। उन्होंने बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गांधी की मूल्य आधारित पत्रकारिता की परंपरा का उदाहरण देकर कहा कि आज संविधान भी इसकी अपेक्षा करता है। यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करेंगे, तो वह उसी डाल को काटने जैसा होगा जिस पर हम स्वयं बैठे हैं।
विभिन्न क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में पत्रिका समूह के डिप्टी एडिटर भुवनेश जैन ने कार्यक्रम के आरंभ में सभी को पत्रिका की उपलब्धियों से अवगत कराया, वहीं राजस्थान पत्रिका के स्टेट हेड विजय चौधरी ने अतिथियों का आभार जताया। पत्रिका के डिप्टी एडिटर हरीश पाराशर ने कार्यक्रम का संचालन किया।
Updated on:
04 Jan 2026 09:20 pm
Published on:
04 Jan 2026 09:14 pm
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