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साल में केवल 12 घंटे के लिए खुलता है राजस्थान का यह गणेश मंदिर, दर्शन से ही पूरी हो जाती है हर मुराद

इस बार गणेशोत्सव पर ख़ास संयोग पूरे 10 साल बाद बन रहा है, जब बुधवार और गणेश चतुर्थी एक साथ है, आप किसी प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन करने के लिए सोच रहें हैं तो आपको बता दें, जोधपुर का एक ऐसा मंदिर जो सिर्फ साल में गणेशोत्सव के दिन 12 घंटे के लिए खुलता है।

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Uchisth Ganpati Temple Jodhpur Rajsthan Opens Only For 12 Hours In A Year

सनातन धर्म में गणेशजी का अलग ही स्थान है। कोरोना काल के कारण बीते 2 साल से गणेशोत्सव को धूमधाम से नहीं मनाया जा सका गया। इस साल गणेश चतुर्थी 31 अगस्त को मनाई जाएंगी, जो अगले 10 दिनों तक चलेगी। दो साल बाद सिद्धि विनायक के दर्शन के लिए फिर मंदिरों में लम्बी कतारें लगेगी। इस बार गणेशोत्सव पर ख़ास संयोग पूरे 10 साल बाद बन रहा है, जब बुधवार और गणेश चतुर्थी एक साथ है, ऐसे में अगर आप किसी प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन करने के लिए सोच रहें हैं तो आपको बता दें, जोधपुर का एक ऐसा मंदिर जो सिर्फ साल में गणेशोत्सव के दिन 12 घंटे के लिए खुलता है। यह मंदिर उच्छिष्ट गणपति के देश में चुनिंदा मंदिरों में गिना जाता है। पूरे भारत भर में उच्छिष्ट गणपति की बहुत कम प्रतिमाएं हैं, जिनमे से यह एक है।

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पच्चीस साल पहले विराजमान हुए उच्छिष्ट गणपति
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि लोक कल्याण के लिए इस मंदिर की स्थापना करीब पच्चीस वर्ष पूर्व चांदी हाल निवासी पंडित शिवनारायण दवे ने की थी। बताया जाता है कि यह प्रतिमा विशेष रूप से जयपुर से बनवाकर लाई गई थी। इस मंदिर को साल में एक बार खोलने का नियम है, जो कल गणेश चतुर्थी के मौके पर खोला जाएगा। मंदिर खोलने से पहले दस हजार आहुतिया यज्ञ में दी जाती है, इसके बाद ही मंदिर खोला जाता है।

दर्शन प्रक्रिया भी अलग:
माना जाता है कि उच्छिष्ट गणपति का यह रूप, गणेश के अन्य स्वरूपों से दस गुना जल्दी फल देता है। विनायक के इस स्वरूप की पूजा करने से समृद्धि और उच्च पद की प्राप्ति होती है। शास्त्रीय नियमों के अनुसार इनके दर्शन करते समय मुंह में गुड़, लड्डू, पान, सुपारी, इलायची आदि होना चाहिए। जूठे मुंह जाने पर जो आपके मुंह में हैं, उस अनुसार मनोकामना पूर्ण होने की बात मानी जाती है। बताया जाता है कि यहां दर्शन करने के लिए पुरष और महिलाओं को अलग-अलग समय दर्शन करने के लिए भेजा जाता है। मान्यता के अनुसार सिंदूर और दूर्वा चढ़ाने से विवाह जल्दी तय हो जाता है।

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आचार्य पंडित कमलेश ने बताया कि यह मंदिर साल में एक बार12 घंटे के लिए खुलता है, जो कि शाम 5:30 बजे से लेकर सुबह 6:30 बजे तक खोला जाता है। भगवान के दर्शन करने के लिए मंदिर खुलने के कई घंटों पहले ही भक्तों की भीड़ उमड़ जाती है। यह मंदिर विशेष मंदिरों में से एक है जिसके दर्शन रात को किये जाते है।

दक्षिण भारत में है मुख्य मंदिर
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, पहले के समय में गणपति के इस स्वरूप की साधना करने वाले अल्प भोजन से हजारों लोगों का भंडारा कर देते थे। उच्छिष्ट गणपति का एक मंदिर दक्षिण भारत में तिरुनेलवेली के समीप स्थित है। यह मंदिर करीब तेरह सौ वर्ष पुराना बताया जाता है।