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उदयपुर में बचकर, यहां घूम रहे हैं सबसे ज्यादा हिस्ट्रीशीटर

Crime Capital Of Rajasthan : उदयपुर भले ही अपनी झीलों के लिए दुनिया में विख्यात है लेकिन धीरे धीरे यह कुख्यात भी हो रहा है। शेखावाटी को शिकस्त देकर उदयपुर राजस्थान का सबसे ज्यादा हिस्ट्रीशीटर वाला जिला भी बना गया है। सरेआम हत्या तो यहां आम होती दिखाई दे रही है। आदतन अपराधी प्रदेश में भय का माहौल बना रहे हैं। उदयपुर रेंज में 1781 हिस्ट्रीशीटर हैं। जोधपुर 1600 अपराधियों के साथ दूसरे नंबर पर है और कोटा 1489 बदमाशों के साथ तीसरे नंबर पर है।

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Crime Capital Of Rajasthan : उदयपुर भले ही अपनी झीलों के लिए दुनिया में विख्यात है लेकिन धीरे धीरे यह कुख्यात भी हो रहा है। शेखावाटी को शिकस्त देकर उदयपुर राजस्थान का सबसे ज्यादा हिस्ट्रीसीटर वाला जिला भी बना गया है। सरेआम हत्या तो यहां आम होती दिखाई दे रही है। आदतन अपराधी प्रदेश में भय का माहौल बना रहे हैं। उदयपुर रेंज में 1781 हिस्ट्रीशीटर हैं। जोधपुर 1600 अपराधियों के साथ दूसरे नंबर पर है और कोटा 1489 बदमाशों के साथ तीसरे नंबर पर है।

सीकर, जयपुर, अलवर, जोधपुर के बाद उदयपुर में सरेआम हत्या जैसी बड़ी वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। अपराधियों की मौजूदगी की बात करें तो उदयपुर अपराधियों की राजधानी बन चुका है। सबसे ज्यादा हिस्ट्रीशीटर उदयपुर में है, जबकि बीते दो साल में सर्वाधिक 15 फीसदी बढ़ोतरी जोधपुर में हुई है।

उदयपुर रेंज में 2.65 प्रतिशत, जोधपुर रेंज में 15.10 प्रतिशत, कोटा रेंज में 7.58 प्रतिशत, अजमेर रेंज में 4.02 प्रतिशत, जयपुर रेंज में 4.6 प्रतिशत, बीकानेर रेंज में 2.93 प्रतिशत, भरतपुर रेंज में 3.45 प्रतिशत, जयपुर कमिश्नरेट में 9.37 प्रतिशत, जोधपुर कमिश्नरेट में 11.94 प्रतिशत, जीआरपी रेंज में 00 प्रतिशत प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।

उदयपुर रेंज में इसलिए संख्या ज्यादा

● उदयपुर रेंज के जिलों की सीमा गुजरात से लगती है, जिससे शराब व मादक पदार्थ तस्करी के अपराध बार-बार होते हैं।

● प्रतापगढ़-चित्तौडग़ढ़ और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती हिस्से में अफीम की पैदावार अधिक होती है, जिससे तस्करी भी ज्यादा है।

● प्रदेश में पुलिस विभाग के लिहाज से सबसे बड़ा जिला उदयपुर है, जहां 49 थाने हैं, जबकि एक पुलिस अधीक्षक का ही पद है।

● पर्यटन नगरी होने से बाहरी लोगों का यहां जमीनों में काफी निवेश है, जमीन व संपत्ति संबंधी अपराध की संख्या अधिक है।

ये होता है हिस्ट्रीशीट में

लगातार अपराध करते हुए जब कोई अपराधी बड़ी वारदात को अंजाम देता है तो पुलिस के लिए परेशानी हो जाती है। बार-बार अपराध करने और गंभीर अपराधी होने पर हिस्ट्री शीट खोली जाती है। ये अपराधी का कच्चा-चिट्ठा होता है, जिसमें नाम-उपनाम, ठिकाने, साल-दर-साल गतिविधियां, परिवार की स्थिति, वारदातों का रिकॉर्ड, फिंगर प्रिंट आदि रिकॉर्ड रखा जाता है।