
राज्य के जिला उद्योग केन्द्रों को और अधिक सक्रिय व सशक्त की दिशा में काम किया जाएगा । अब इन्हें जिले के औद्योगिक विकास का प्रमुख केन्द्र बनाया जाएगा। जिला उद्योग केन्द्रों मेें एमएसएमई इंवेस्टमेंट फेसिलिटी सेंटर एमआईएफसी विकसित किए जाएंगे। यानि जिला उद्योग केन्द्र फेसिलिएटर की भूमिका में आएंगे। यह कहना है उद्योग आयुक्त कुंजीलाल मीणा का।
उद्योग भवन में केपीएमजी व चुनिंदा जिलाें के जिला उद्योग केन्द्रों के महाप्रबंधकों की ब्रेन स्टोर्मिंग कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें उन्होंने कहा कि प्रदेश का तेजी से औद्योगिक विकास और युवाओं को रोजगार व उद्यमियता विकास केन्द्र व राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिला उद्योग केन्द्रों को बदलते सिनेरियो में लीक से हटकर फेसिलिएटर की भूमिका निभानी होगी जिससे आवश्यक जानकारी, योजनाओं, कार्यक्रमों, कानून कायदों और प्रक्रियाओं आदि की जानकारी व आवश्यक सहयोग जिला स्तर पर उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि आज देश व प्रदेश में औद्योगिक विकास के मायने बदले हैं और उत्पादन के साथ ही सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि ऎसे में जिला उद्योग केन्द्रों की नई भूमिका तय करनी होगी।
संयुक्त निदेशक सीएल वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार के वित्तीय सहयोग से जिला उद्योग केन्द्रों में एमआईएफसी विकसित की जाएगी। कार्यशाला के प्रभारी उपनिदेशक संजय मामगेन ने बताया कि जिला उद्योग केन्द्राें की भूमिका में तेजी से बदलाव आ रहा है। कार्यशाला में केपीएमजी के धवल पिपलानी और विवेक झा ने कम्प्यूटर स्लाइड प्रजेटेंशन के माध्यम से जिला उद्योग केन्द्रों की बदलती भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यशाला में जिला उद्योग केन्द्रों के महाप्रबंधकों में कोटा श्री योगेश माथुर, जयपुर ग्रामीण मधुसूदन शर्मा, जयपुर शहर आरके आमेरिया, अजमेर सीबी नवल, भिवाडी शिवचरण मथुरिया, चूरु पीएन शर्मा, टोंक शैलेन्द्र शर्मा और सहायक निदेशक उदयपुर मंजू ने हिस्सा लिया । इस दौरान परस्पर समन्वय को बढ़ाने, इन्टीग्रेटेड़ सॉफ्टवेयर तैयार करने, मानव संसाधन की सहज उपलब्धता और अधिकारियों व कार्मिकों के नियमित प्रशिक्षण व ओरियंटेशन कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दिलाने का सुझाव दिया।
Published on:
09 Apr 2018 07:58 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
