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भारत के पहले फुटबॉल क्लब में ऐसा क्या हुआ था कि क्लब ने कहा मैच हार जाओ…

भारत के पहले फुटबॉल क्लब में ऐसा क्या हुआ था कि क्लब ने कहा मैच हार जाओ...
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जयपुर

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Rajesh

Jun 20, 2018

Union Football Ground jaipur

Union Football Ground jaipur

जयपुर।

फुटबॉल का महाकुम्भ गुरुवार से रूस में शुरू हुआ। फुटबॉल के दीवाने दुनिया के अलग-अलग देशों से रूस पहुंच रहे हैं। लेकिन हजारों मील दूर गुलाबी शहर जयपुर में भी सॉकर वल्र्ड कप की गर्मी को आसानी से महसूस किया जा सकता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत का पहला फुटबॉल क्लब जयपुर में बना था। यूनियन फुटबॉल क्लब के नाम से अप्रेल 1889 में इसकी स्थापना हुई थी जबकि कोलकाता के मोहन बागान क्लब की स्थापना अगस्त 1889 में हुई थी। 129 साल पुराना यह क्लब और रामनिवास बाग में बने इस फुटबॉल ग्राउण्ड पर भी इन दिनों सॉकर की खुमारी देखने को मिल रही है। वहीं शहर के पुराने खिलाडिय़ों के जेहन में आज भी फुटबॉल का वो स्वर्णिम युग याद कर रोमांचित होते हैं जब यूनियन फुटबॉल ग्राउण्ड पर नेशनल-इंटरनेशनल मुकाबलों की गर्मी मैदान के बाहर बैठे दर्शक भी महसूस करते थे। मदर ऑफ फुटबॉल के नाम से मशहूर यूनियन फुटबॉल ग्राउण्ड पर सरदार पटेल नेशनल टूर्नामेंट जैसे स्थापित टूर्नामेंट्स भी खेले गए हैं।

जब क्लब ने कहा मैच हार जाओ

1964 में हुए सरदार पटेल टूर्नामेंट को याद करते हुए पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी सरदार हरजिंदर सिंह झिक्का बताते हैं कि फाइनल से पहले के मुकाबले में बॉम्बे पुलिस क्लब से कांटे का मुकाबला चल रहा था। 6 गोल की बढ़त के साथ हम लगभग मैच जीत ही चुके थे कि बॉम्बे की टीम ने बैड लाइट को लेकर शिकायत की और मैच रद्द कर दिया गया। अगले दिन फिर से दोनों टीमों के बीच मैच हुआ और यूनियन क्लब 2-0 की बढ़त के साथ मैच जीतने के करीब ही था कि क्लब के वरिष्ठ अधिकारी नारायणदास महाराज ने इशारा कर गोल खाने को कहा। खिलाड़ी अचम्भे में थे लेकिन बाद में उन्होंने बताया कि अगर लगातार हमारी ही टीम जीतेगी तो गेट मनी आना बंद हो जाएगी और क्लब को लाखों का नुकसान होगा। इस टूर्नामेंट में बॉम्बे पुलिस ने ही फाइनल जीता था।

देश को दिए कई नामी खिलाड़ी

यूनियन क्लब 1958 से लेकर 1970 तक राष्ट्रीय स्तर का सरदार पटेल फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित करता रहा है। मदर ऑफ फुटबॉल के नाम से पहचाने जाने वाले इस ग्राउण्ड से 1945 से 1970 के बीच वैद्य स्वामी मंगलदास शास्त्री, बी.ई.आर. बॉनर जॉर्ज, सरदार जसवंत सिंह, अब्दुल शकूर, मुख्तयार, महताब अली, शैतान सिंह, बाबूलाल शर्मा, दामोदर शर्मा, त्रिलोकचंद सोखियां, अहसान इलाही, सगीर अहमद नकवी, सुदर्शन कुमार शर्मा, गोपाल कृष्ण तेलंग, मुजफ्फर बेग, रूपनारायण झरवाल, अमरनाथ शर्मा, अब्दुल गनी, चंद्रमोहन टम्मू जैसे खिलाड़ी यहां खेला करते थे।

इन क्लबों की रही धूम
-मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब
-बलदेव स्पोर्टिंग क्लब
-सिटी क्लब
-सेना और पुलिस की राष्ट्रीय स्तर की टीमें
-बिहार मिलिट्री सर्विस और राष्ट्रीयकृत बैंकों की टीम

कर सकते नए खिलाड़ी तैयार

ऐसा नहीं है कि क्लब अपने स्तर पर कुछ भी नहीं कर रहा है। क्लब अपने स्तर पर इसके लिए जोर-शोर से प्रयास कर रहा है कि क्लब एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों को इस ग्राउण्ड पर तराशे जो देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। लेकिन क्लब के इन पदाधिकारियों को इस बात की पीड़ा है कि हिन्दुस्तान के सबसे पुराने फुटबॉल क्लब के इस ग्राउण्ड की बदहाली की किसी को फिक्र नहीं है। क्रिकेट की आंधी में फुटबॉल का वो जुनून अब कहीं खो सा गया है जिसे देखने खुद राज परिवार और प्रदेश के मुख्यमंत्री तक इस ग्राउण्ड पर आया करते थे।

फैक्ट फाइल

-129 साल पुराना है यूनियन फुटबॉल क्लब
-1889 में हुई थी क्लब की स्थापना
-5 टीमें होती थीं क्लब की किसी जमाने में
-1965 तक आयोजित होता था सरदार पटेल टूर्नामेंट