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विकास कार्य को मिलेगी गति, आरयूडीएफ का गठन

नगरीय निकायों (Urban Bodies) की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने फिर से राजस्थान शहरी विकास निधि (आरयूडीएफ) (Rajasthan Urban Development Fund) का गठन किया है। इस फण्ड के गठन से राज्य की कमजोर नगरीय निकायों को उनके आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्तिय सहायता दी जाएगी। इससे शहरी क्षेत्रों में विकास कार्य को गति मिल सकेगी। पूर्व भाजपा सरकार ने आरयूडीएफ पर रोक लगा दी थी।

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विकास कार्य को मिलेगी गति, आरयूडीएफ का गठन

विकास कार्य को मिलेगी गति, आरयूडीएफ का गठन

विकास कार्य को मिलेगी गति, आरयूडीएफ का गठन

- राजस्थान शहरी विकास निधि (आरयूडीएफ) का गठन
— नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए किया गठन
— मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद जारी किए आदेश
— नगरीय क्षेत्रों में विकास कार्यो को मिलेगी गति

जयपुर। नगरीय निकायों (Urban Bodies) की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने फिर से राजस्थान शहरी विकास निधि (आरयूडीएफ) (Rajasthan Urban Development Fund) का गठन किया है। इस फण्ड के गठन से राज्य की कमजोर नगरीय निकायों को उनके आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्तिय सहायता दी जाएगी। इससे शहरी क्षेत्रों में विकास कार्य को गति मिल सकेगी। प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार ने राजस्थान अरबन डवलपमेंट फण्ड (आरयूडीएफ) पर रोक लगा दी थी।

नगरीय विकास आवासन और स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने ने बताया कि प्रदेश की नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और नगरीय क्षेत्रों में विकास कार्यो को गति देने के लिए राजस्थान शहरी विकास निधि (आरयूडीएफ) का गठन किया गया है। आरयूडीएफ के तहत आर्थिक रूप से सक्षम नगरीय निकायों से वित्तीय अंशदान प्राप्त कर आर्थिक रूप से कमजोर नगरीय निकायों को वित्तिय सहायता की जाएगी। नगरीय निकायों में आधारभूत संरचंना और सुविधाओं के विकास, नगरीय निकायों को वित्तिय संस्थाओं से ऋण की सुविधा इस फण्ड के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि आरयूडीएफ के माध्यम से नगरीय निकायों को केन्द्रीय प्रवर्तित योजनाओं, एनजीटी के मापदण्डों को पूरा करने के लिए वित्तिय संसाधन उपलब्ध करवाये जाएंगे। इसके अतिरिक्त अमृत योजना, स्मार्ट सिटी मिशन आदि में नगरीय निकायों की ओर से वहन की जाने वाली हिस्सा राशि की पूर्ति भी इससे की जा सकेगी। इसके गठन से नगरीय निकाय आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बन सकेगी।


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