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वसुंधरा के बेटे के सामने फिर पूर्व मंत्री भाया की पत्नी लड़ेंगी चुनाव, क्या इस बार चुकता होगा 15 साल पुराना हिसाब?

Urmila Jain Bhaya against Dushyant Singh : कांग्रेस ने बारां-झालावाड़ सीट से गहलोत सरकार में पूर्व मंत्री रहे प्रमोद जैन भाया की पत्नी उर्मिला जैन भाया को प्रत्याशी बनाया है। दूसरी ओर, भाजपा ने इस सीट पर पहले से ही दुष्यंत सिंह को चुनावी मैदान में उतार रखा है।

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Urmila Jain Bhaya against Dushyant Singh: राजस्थान में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने गुरुवार को तीसरी लिस्ट जारी कर दी है। कांग्रेस ने इस सूची में 5 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया है तो वहीं सीकर सीट माकपा से गठबंधन के तहत छोड़ी है। कांग्रेस ने बारां-झालावाड़ सीट से गहलोत सरकार में पूर्व मंत्री रहे प्रमोद जैन भाया की पत्नी उर्मिला जैन भाया को प्रत्याशी बनाया है। दूसरी ओर भाजपा ने इस सीट पर पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है।

उर्मिला जैन भाया वर्तमान में बारां की जिला प्रमुख हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी दुष्यंत सिंह बारां-झालावाड़ से 5वीं बार लगातार चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर पिछले 35 साल से भाजपा का कब्जा है। अब देखना होगा कि क्या पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया की पत्नी उर्मिला जैन भाया चुनाव जीत पाती हैं या नहीं।

बारां-झालावाड़ सीट से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कई बार जीत दर्ज की थी। उनके बाद दुष्यंत सिंह यहां से चुनाव लड़ते आ रहेहैं। उर्मिला जैन भाया इससे पहले साल 2009 में बारां-झालावाड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। उस चुनाव में दुष्यंत सिंह को 428996 वोट मिले, जबकि उर्मिला जैन भाया को 376208 वोट मिले थे। दुष्यंत सिंह ने उन्हें करीब 52841 वोटों से हाराया था। ऐसे में एक बार फिर 15 साल बाद दोनों नेता आमने-सामने है।

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मूल रूप से बारां की निवासी 51 साल की उर्मिला जैन भाया बीते दो दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। उर्मिला जैन भाया के पति प्रमोद जैन भाया राजस्थान सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं। भाया पांच विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें तीन बार विधायक बने है। पहली बार उन्होंने 2003 में चुनाव लड़ा था, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीते थे। इसके अलावा एक बार लोकसभा का चुनाव भी उन्होंने लड़ा है। उनका बेटा यश जैन बारां यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष है।

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साल 2021 में हुए जिला परिषद के चुनाव में बारां जिले की 25 सीटों में से 13 पर भारतीय जनता पार्टी और 12 पर कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे। इसके बाद भी बिना बहुमत के आखिरी वक्त पर तत्कालीन खनन व गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने जोड़-तोड़कर अपनी पत्नी को जिला प्रमुख बनवाया था। बाड़ेबंदी के बावजूद भाजपा के जिला परिषद सदस्य ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके चलते उर्मिला जैन को 13 मत मिले थे, जबकि पराजित रहीं भाजपा उम्मीदवार प्रियंका शर्मा को 12 मत मिले थे।


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