
new M-sand policy: सरकारी निर्माण कार्यों में 25 प्रतिशत एम सेंड के उपयोग अब जरूरी
new M-sand policy: राज्य सरकार अब सरकारी निर्माण कार्यों में उपयोग में आने वाली कुल बजरी की मात्रा में कम से कम 25 प्रतिशत एम सेंड के उपयोग के प्रति गंभीर हो गई है। राजस्थान सरकार ने बजरी के सस्ते व सुगम विकल्प के रुप में एम सेंड के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में एम सेंड नीति लागू की है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से जारी एम-सेंड नीति में सरकारी निर्माण कार्यों मेें बजरी के विकल्प के रुप में कम से कम 25 प्रतिशत एम सेंड का उपयोग अनिवार्य है। एम सेंड नीति जारी होने के बाद अब प्रदेश में कुल मिलाकर 36 एम सेंड इकाइयों द्वारा एक करोड़ 20 लाख टन वार्षिक उत्पादन होने लगा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम व जलदाय डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की एम सेंड नीति के अनुसार राज्य सराकार के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी, स्थानीय निकाय, पंचायतीराज संस्थाएं एवं राज्य सरकार की वित्त पोषित अन्य संस्थाओं को जनवरी 21 के बाद जारी होने वाले कार्यादेशों में एम सेंड की कम से कम 25 प्रतिशत मात्रा के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।
सहज, सस्ता व सुगम विकल्प
राज्य सरकार ने बजरी के सहज, सस्ता व सुगम विकल्प और पर्यावरण व पारिस्थिति की सुधार के लिए एम सेंड नीति जारी करते हुए यह आदेश जारी किए थे। इसके साथ ही एम सेंड इकाइयों को प्रमोट करने के लिए राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना में आकर्षक प्रावधान किए गए। रिप्स में एम सेंड इकाई को उद्योग का दर्जा, एसजीएसटी पर 75 प्रतिशत निवेश सब्सिडी, विद्युत शुल्क, भूमि कर व स्टाम्प शुल्क में शत—प्रतिशत छूट दी गई है। इसी तरह से दो करोड़ या उससे अधिक के निवेश पर एसजीएसटी पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त सब्सिडी, प्लांट/मशीनरी में निवेश हेतु 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान एवं 20 प्रतिशत निवेश के बराबर पूंजी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। अतिरिक्त निदेशक बीएस सोढ़ा को बजरी और एम सेंड नीति के क्रियान्वयन के लिए प्रभारी अधिकारी बनाया हुआ है।
कर्नाटक, तेलगांना व तमिलनाडू में भी प्रमुखता से उपयोग
राजस्थान के साथ ही कर्नाटक, तेलगांना व तमिलनाडू में बजरी के विकल्प के रुप में एम सेंड का प्रमुखता से उपयोग किया जा रहा है। कर्नाटक में सर्वाधिक 2 करोड़ टन, तेलंगाना में 70 लाख 20 हजार टन और तमिलनाडू मेें 30 लाख 24 हजार टन एम सेंड का सालाना उत्पादन हो रहा है। निदेशक माइंस केबी पण्ड्या ने बताया कि एम सेंड नीति के अनुसार एम सेंड इकाई के लिए अलग से खनन प्लाट आरक्षित कर नीलामी और आवरबर्डन डम्प्स से नीलामी द्वारा 10 साल की अवधि का परमिट दिए जाने का प्रावधान किया गया है। एम सेंड निर्माण कार्य के लिए बेहतर होने के साथ ही बजरी की तुलना मेें सस्ती, सहज उपलब्धता और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है। निदेशक केबी पण्ड्या ने बताया कि विभाग द्वारा नई एम सेंड इकाइयों की स्थापना के लिए प्रेरित किया जा रहा हैं वहीं सरकारी विभागोें के निर्माण कार्यों मेें कम से कम 25 प्रतिशत एम सेंड के उपयोग की अनिवार्यता से बजरी के विकल्प को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
Published on:
08 Jul 2022 10:15 am
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