
Uttarshada Nakshatra , Auspicious Yog In Kundli , Nakshatra Uttarshada
जयपुर. 26 सितंबर को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र है। नक्षत्रों का ज्योतिष में सबसे ज्यादा महत्व बताया गया है। अलग—अलग नक्षत्रों का अलग—अलग प्रभाव भी पाया जाता है। ज्योतिष ग्रंथों में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं जिनमें उत्तराषाढ़ा नक्षत्र भी शामिल है। इस नक्षत्र के जातक आध्यात्मिक रुचि रखता हैं और प्राय: धार्मिक अनुष्ठाप जैसे जप—तप—व्रत, पूजा—पाठ, उपवास आदि करते रहते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार ऐसे जातक निरंतर कर्म करने में विश्वास रखते हैं और अत्यधिक परिश्रमी होते हैं। इन लोगों का बचपन अच्छा बीतता है हालांकि इन्हें कम उम्र से ही घर की अहम ज़िम्मेदारियां उठानी पड़ती हैं। ऐसे लोगों को सामान्यत: 38 वर्ष की आयु तक कुछ संघर्ष करना पड़ता है. इसके बाद तेजी से प्रगति करते हैं और इन्हें चहुंमुखी सफलता मिलती है।
इनका रुप—रंग, कद—काठी आकर्षक रहती है. ये थोड़े हठी स्वभाव के होते हैं और प्राय:विवादों से बचते हैं। इन जातकों का पारिवारिक जीवन अच्छा रहता है. इन्हें अच्छे स्वभाव का मिलनसार जीवनसाथी मिलता है पर जीवनसाथी अक्सर बीमार रहता है। बच्चों से मतभेद रह सकता है लेकिन वे उच्चशिक्षित रहते हैं। ऐसे लोगों को नेत्र और पेट से सम्बंधित रोग रह सकते हैं।
इस नक्षत्र में जन्म लेनेवाले लोग धर्म—कर्म से संबंधित कैरियर में खास सफल होते हैं. ऐसे लोग अच्छे पुरोहित, कथावाचक, ज्योतिषी, प्रवचनकर्ता आदि बनते हैं. वकील, न्यायधीश, मनोविज्ञानिक, सेना से जुड़े कार्य, सुरक्षाकर्मी, अंगरक्षक, आध्यात्मिक चिकित्सक, राजनैतिक नेता, व्यवसाय, बैंकिंग के साथ ही पशु पालन, पहलवान, बॉक्सर, एथलीट, अध्यापक आदि कार्य में सफल हो सकते हैं।
Published on:
26 Sept 2020 11:07 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
