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लुप्त हो रहे दुर्लभ जीवों को बचा सकते हैं बच्चे, जानिए कैसे

-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की बच्चों से सिटिजन साइंटिस्ट बनने की अपील

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अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की बच्चों से सिटिजन साइंटिस्ट बनने की अपील

लुप्त हो रहे दुर्लभ जीवों को बचा सकते हैं बच्चे, जानिए कैसे

जयपुर.

जलवायु परिवर्तन का खतरा दुर्लभ जीवों के वजूद पर भी मंडराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आइयूसीएन) के मुताबिक विश्व में पक्षियों की 14 प्रतिशत प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। ये खतरा 40 फीसदी उभयचर और 25 फीसदी स्तनधारी प्रजातियों पर भी है। इनमें बाघ, विशालकाय पांडा, अफ्रीकी हाथी जैसे विशाल जीव शामिल हैं। कुछ कम चर्चित प्रजातियां भी हैं, जैसे रेड नोट। वैज्ञानिकों का मानना है कि लुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने के लिए बच्चे सिटीजन साइंटिस्ट बनकर मददगार साबित हो सकते हैं। पर्यावरणविद बिल मैक्सिया कहती हैं कि यदि बच्चे पूर्वी तट पर रेड नॉट का पता लगाते हैं तो वे ई-बर्ड के जरिए वैज्ञानिकों को सूचना दे सकते हैं। ई-बर्ड वेबसाइट पर अब तक करीब 10 करोड़ पक्षियों को सूचीबद्ध किया गया है। वन्यजीवों से जुड़ी वेबसाइट ई-मेमल भी बच्चों को कैमरा टै्रपर्स बनने में मदद करता है। इसमें भी स्वयंसेवक जीवों की कैमरा टै्रप और मोशन कैमरा से ली गई तस्वीरों को साइट पर अपलोड करने में पेशेवर वैज्ञानिकों की मदद करते हैं। इस तरह भविष्य के संरक्षण में भूमिका अदा कर बच्चे प्रकृति से जुड़ते हैं। बच्चों में प्रकृति की देखभाल कर विचार बदलने की क्षमता होती है।

नीली आंखों वाले काले लेमूर को बचाओ
अफ्रीकी देश मेडागास्कर में पाया जाने वाला लेमूर वानर प्रजाति का ही एक जीव है। नटखट और अनोखी नीली आंखों वाले लेमूर का वजूद खतरे में है। इस वक्त इनकी संख्या एक हजार है। नर लेमूर काले और मादा भूरे या लाल भूरे रंग की होती हैं। इनका वजन 3 से 5 पौंड तक होता है।

हर वर्ष 15000 किमी यात्रा करने वाला रेड नॉट
उत्तरी अमरीका महाद्वीप का एक रंगीन पक्षी है। यह हर वर्ष आर्कटिक से 15000 किमी की यात्रा कर दक्षिण अमरीका तक माइगे्रट करता है। जो दुनिया में किसी भी पक्षी द्वारा तय की जाने वाली सर्वाधिक दूरी है। रेड नॉट भी लुप्त होने वाली प्रजातियों में है।

दुर्लभ तोता जो रात को जगता है, उड़ नहीं पाता
न्यूजीलैंड में पाया जाने वाला काकापो, एक दुर्लभ प्रजाति का तोता है। इस वक्त 147 काकोपा बचे हैं। यह उल्लू और बतख जैसा दिखता है। दिन में सोता है और रात में जगता है। सबसे बड़ी बात ये चढ़ सकता है, लेकिन उड़ नहीं सकता। यह 60 से 90 वर्ष तक जिंदा रह सकता है। न्यूजीलैंड सरकार कहती है, यदि आप काकापो को बचाने में मदद करना चाहते हैं तो किसी संरक्षण समूह से जुड़ जाएं और सहयोग दें।

सिर्फ 100 साओला बचे हैं धरती पर
दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाने वाला रहस्यमयी जीव है साओला। गोवंश प्रजाति यह जीव हिरण और बकरी जैसा लगता है। इस वक्त पृथ्वी पर करीब 100 साओला बताए जाते हैं, जो वियतनाम और लाओस के पर्वतीय जंगलों में रहते हैं। वन्यजीव संरक्षण के जीव विज्ञानी बिल रॉबिचौड़ बताते हैं, प्रजनन के लिए इतने भी मादा साओला नहीं बची हैं कि इनकी आबादी बढ़ाई जा सके। वैज्ञानिकों के लिए इनकी खोजबीन करना भी काफी चुनौतीपूर्ण है। यदि जंगलों में इन्हे खोज भी लिया जाए तो वहां जोंक हमला कर देंगे जो वहां बड़ी संख्या में हैं।

भारत में बाघों को देखकर बच्चों ने भेजी जानकारी
नॉर्थ कैरोलिना संग्रहालय की शोधकर्ता स्टेफनी स्कटलर के मुताबिक भारत में एक अभयारण्य के पास स्कूल के इर्द-गिर्द रात के अंधेरे में विचरण कर रहे छह बाघों की जानकारी बच्चों ने ई-मेमल पर साझा की थी। इससे बाघों की गणना में मदद मिली।

ये साइट करेंगी मदद
1. eMammal.si.edu
नागरिक वैज्ञानिक बनने के लिए।
2. ebird.org
पक्षियों की संख्या और लोकेशन की जानकारी के लिए।
3. bumblebeewatch.org
भंवरों के टै्रक और संरक्षण के लिए।
4. journeynorth.org/monarchs
तितलियों के प्रवास की जानकारी