
Varaha Jayanti 2020 Significance
जयपुर. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर दैत्य हिरण्याक्ष का वध किया था। वराह जयन्ती पर भगवान विष्णु का पूजन का विधान है जिससे सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से वराह अवतार भी है। वराह शूकर को कहा जाता है। भागवत पुराण के अनुसार ब्रह्माजी को सृष्टि के लिये जमीन की आवश्यकता पडी लेकिन हिरण्याक्ष भूमि को सागर के भीतर ले जाकर अपना तकिया बना कर सो गया. देवताओं को दूर रखने के लिए उसने चारों ओर विष्ठा का घेरा बना लिया था। ब्रह्माजी ने विचार किया कि विष्ठा के पास और कोई तो जाएगा नहीं, केवल शूकर ही विष्ठा के समीप जा सकता है। उन्होंने तुरंत भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अपनी नासिका से वाराह नारायण को जन्म दिया और उन्हें भूूमि अर्थात पृथ्वी को ऊपर लाने की आज्ञा दी।
वराह के रूप में विष्णु भगवान समुद्र में उतरे और हिरण्याक्ष का संहार कर भू देवी को मुक्त किया। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार इस अवतार के माध्यम से विष्णुजी ने दूसरों के धन को हड़पनेवालों को भी संदेश दिया। हिरण्याक्ष ने भू देवी को हड़प लिया था, इसलिए उसकी दुर्गति हुई। वराह जयन्ती पर विष्णु सहस्रनाम का पाठ फलदायी होता है।
Published on:
21 Aug 2020 08:37 am

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