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Basant Panchami 2021 Importance देवी सरस्वती के प्राकट्य के साथ सृष्टि पर संगीत, विद्या और ज्ञान आने का दिन

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Vasant Panchami 2021 Basant Panchmi Saraswati Puja Vidhi

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जयपुर. माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी पर्व मनाया जाता है। बसंत पंचमी देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस है। इसे बसंत ऋतु की शुरुआत का दिन माना जाता है लेकिन ऐसा है नहीं। ज्योतिषाचार्य सोमेश परसाई बताते हैं कि मां सरस्वती की पूजा का पर्व है। इस दिन देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं इसलिए इसे श्री पंचमी भी कहते हैं।

वसंत पंचमी को वागीश्वरी जयन्ती के रूप में भी मनाया जाता है। वागीश्वरी देवी सरस्वती का ही एक अन्य नाम है। इस बार 16 फरवरी, मंगलवार को पंचमी तिथि पूरा दिन और रात रहेगी. इससे अहर्निश नामक शुभ योग बन रहा है। ऐसे में देवी सरस्वती की पूजा और नए कामों की शुरुआत करना शुभ रहेगा। मान्यता है कि शास्त्रीय संगीत में विख्यात वसंत राग की इसी दिन शुरुआत हुई। इस उमंग और उल्लास का राग है।

ब्रह्माजी ने जब सृष्टि बनाई तब संसार में कोई उत्साह—उल्लास नहीं था। सृष्टिवासियों में हर्षौल्लास के लिए उन्होंने अपने कमंडल से थोड़ा सा जल जमीन पर छिड़का। तब सफेद कपड़े पहने, हाथ में वीणा लिए देवी सरस्वती प्रकट हुईं। देवी सरस्वती के प्रकट होने से संसार में उल्लास छा गया। संस्कृत में आनंद और उल्लास की स्थिति को वसंत कहा जाता है इसलिए इस दिन को वसंत पंचमी कहा जाने लगा।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी इसे देवी सरस्वती के प्राकट्य दिवस बताया गया है। ऋषि—मुनियों और देवताओं ने वेदों की ऋचाओं से देवी सरस्वती की स्तुति की थी। देवी सरस्वती माघ महीने की पंचमी तिथि पर प्रकट हुई थीं. उन्हीं के साथ सृष्टि में संगीत, विद्या और ज्ञान भी आया। देवी सरस्वती ने संसार में आनंद की भावना भर दी।