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Rajasthan Politics : वसुंधरा राजे का अशोक गहलोत सरकार पर बड़ा ‘बयानी वार’, कह डाली ये बड़ी बातें

Rajasthan Politics : जयपुर ब्लास्ट मामले पर फिर गर्माया सियासी पारा, वसुंधरा राजे का आरोप, 'तुष्टिकरण के कारण गहलोत सरकार ने जानबूझकर की कमज़ोर पैरवी?'

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Vasundhara Raje takes on Ashok Gehlot on Jaipur Bomb Blast Case 2008

जयपुर।
जयपुर ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों आने के बाद राजस्थान का सियासी पारा एक बार फिर गरमा हुआ है। भाजपा नेता इस मुद्दे को पुरज़ोर तरीके से उठाते हुए राज्य सरकार को चौतरफा घेरने में लगे हैं। शीर्ष अदालत की टिप्पणी पर पार्टी के तमाम सीनियर नेता गहलोत सरकार पर हमलावर दिखे।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए गहलोत सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने मौजूदा सरकार पर जयपुर ब्लास्ट की दुखद घटना की कमज़ोर पैरवी करने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा।

'कांग्रेस सरकार ने नहीं की ढंग से पैरवी'
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने ट्वीट संदेश में जारी प्रतिक्रिया में कहा, 'मई, 2008 में गुलाबी नगर को रक्त रंजित कर 80 लोगों की जान लेने और कई लोगों को अपाहिज बनाने वाले जयपुर बम ब्लास्ट मामले में कांग्रेस सरकार ने ढंग से पैरवी नहीं की। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उसी का परिणाम है।'

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'प्रकरण जानबूझकर हलके में लिया'
एक अन्य ट्वीट में पूर्व सीएम राजे ने कहा, 'ऐसे गंभीर प्रकरण को सरकार ने जानबूझकर हल्के में लिया, वरना निचली अदालत का फैसला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बरकरार रहता। इस केस में तो सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ताओं ने 45 दिनों तक पैरवी ही नहीं की। ऐसे में संशय है कि कहीं सरकार के इशारे पर तो ऐसा नहीं हुआ ?

'तुष्टिकरण के चलते तो ऐसा नहीं?'
पूर्व सीएम राजे ने आगे कहा, 'आज उन परिवारों पर क्या बीती होगी जिनके अपने उस वक्त हुए धमाकों में जान गंवा बैठे। उन धमाकों में किसी का सुहाग उजड़ा तो किसी का भाई उससे जुदा हुआ। किसी का पिता, किसी की मां, किसी की बहन, किसी के बच्चे इस हादसे में चल बसे। क्या उनकी चीखें इस सरकार के कानों तक नही पहुंच रही। कहीं सरकार ने तुष्टिकरण के चलते तो ऐसा नहीं किया ?

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ब्लास्ट मामले की दोषी है कांग्रेस सरकार
राजे ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, 'इस प्रकरण में जिस तरह कोताही बरती गई, उससे स्पष्ट है कि राज्य की कांग्रेस सरकार दोषी है। सरकार की मंशा के अनुरूप जयपुर में हुए बम ब्लास्ट के आरोपी भले ही फिलहाल बरी हो गए हों, लेकिन इनके कुशासन से त्रस्त जनता समय पर इसका जवाब जरूर देगी।'

'सुप्रीम' सुनवाई में आये हैं ये आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर बम विस्फोट मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर आंशिक रूप लगाते हुए जांच में लापरवाही के आरोप झेल रहे पुलिसकर्मियों को राहत दी है। वही बम विस्फोट के आरोपियों को लेकर कहा है कि आरोपी बाहर आ गए तो राज्य हित कैसे सुरक्षित रहेगा? ऐसे में जेल से बाहर आने पर भी आरोपियों को रोजाना सुबह 10 से 12 के बीच एटीएस के दफ्तर में हाजरी देनी होगी।

कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 9 अगस्त को अंतिम सुनवाई की तारीख तय की है। वहीं सैफ और सैफुर रहमान को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कैविएट दायर करने वाले तीन आरोपी सुप्रीम कोर्ट में पहले ही आ चुके हैं।

आदेश रद्द करने की गुहार
न्यायाधीश अभय एस. ओका और न्यायाधीश राजेश बिंदल की खंडपीठ ने बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। बम विस्फोट प्रभावित परिवारों के दो सदस्यों की अपील को कोर्ट पहले ही सुनवाई के लिए स्वीकार कर चुका है। इन अपीलों में बम विस्फोट के अभियुक्तों को बरी करने के राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है, वहीं सरकार की अपील में जांच में खामी को लेकर पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही के लिए पुलिस महानिदेशक को दिए आदेश को रद्द करने की गुहार की गई है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों सीएम अशोक गहलोत के पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को लेकर दिए एक सार्वजनिक बयान के बाद सियासी पारा गरमा गया था। धौलपुर में हुई सभा में मुख्यमंत्री ने कहा था कि जब सरकार संकट में थी तब वसुंधरा राजे और कैलाश मेघवाल ने सरकार बचाने में मदद की थी। हालांकि बाद में सीएम गहलोत ने अपने ही बयान पर यू-टर्न लेते हुए साफ़ किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया था। सीएम गहलोत ने वसुंधरा राजे के साथ मिलीभगत के आरोप को खारिज किया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजे से पिछले 15 सालों में शायद ही 15 बार बात की होगी।