23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वेंटिलेटर किराए पर दिए है, फोकट में नहीं के बयान पर राज्यवर्धन का पलटवार

जयपुर ग्रामीण सांसद कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने पीएम केयर फंड से भरतपुर भेजे गए 10 वेंटिलेटर्स को निजी अस्पतालों को किराए पर देने के मामले में सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि जो वेंटिलेटर पीएम केयर फंड से राज्य के हर जिले में पहुंचाए गए जिससे राज्य के गरीब व्यक्ति की जान बचाई जा सके ऐसे वेंटिलेटर्स का बुरा हाल है।

less than 1 minute read
Google source verification

जयपुर

image

Umesh Sharma

May 11, 2021

वेंटिलेटर किराए पर दिए है, फोकट में नहीं के बयान पर राज्यवर्धन का पलटवार

वेंटिलेटर किराए पर दिए है, फोकट में नहीं के बयान पर राज्यवर्धन का पलटवार

जयपुर।

जयपुर ग्रामीण सांसद कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने पीएम केयर फंड से भरतपुर भेजे गए 10 वेंटिलेटर्स को निजी अस्पतालों को किराए पर देने के मामले में सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि जो वेंटिलेटर पीएम केयर फंड से राज्य के हर जिले में पहुंचाए गए जिससे राज्य के गरीब व्यक्ति की जान बचाई जा सके ऐसे वेंटिलेटर्स का बुरा हाल है। चूरू में 40, अलवर में 18, कोटा में 40, सिरोही में 45, कोटपूतली में 17, दौसा में 20 वेंटिलेटर कबाड़ खाने में पड़े हैं।

राज्यवर्धन ने मंत्री द्वारा किराए पर वेंटिलेटर दिए जाने वाले बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया और ट्वीट कर कहा कि पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेसर्ट का उपयोग राज्य के सरकारी अस्पतालों में नहीं किया जा रहा। प्रदेश में वेंटिलेटर या तो कबाड़ खाने में पड़े हैं या सरकार ने उन्हें निजी अस्पतालों को किराए पर दे दिए है। ऐसा करने के बाद सीनाजोरी भी हो रही है कि ’वेंटिलेटर किराए पर ही दिए हैं फोकट में नहीं’’। जिन वेंटिलेटर्स से गरीब की जान बच सकती थी उन्हें गहलोत सरकार ने किराए पर दे दिए और गरीब आदमी को उन्ही निजी अस्पतालों में इलाज के लिए प्रतिदिन 50 हजार रुपए देने पड़ रहें हैं। जिन वेंटिलेटर्स से गरीब की जान बच सकती थी गहलोत सरकार ने उन्हें किराए पर दे दिए।

हमारे विरोध के बाद सरकार ने घुटने टेके

राज्यवर्धन ने कहा कि वेंटिलेटर किराए पर देने को लेकर हमारे विरोध के बाद सरकार ने जनता को राहत देते हुए निजी अस्पताल में दिए जाने पर उनका किराया वसूल नहीं करने का निर्णय लिया है, लेकिन यह भी आधा-अधूरा निर्णय है। गरीब आदमी का आपदा के समय निजी अस्पतालों में निशुल्क इलाज होना चाहिए, यह आपदा है इस पर सरकार को गम्भीरता से विचार करना चाहिए, यही हमारी मांग है।